ग्वालियर। गांधी प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में टाइगर प्रजाति में भविष्य में होने वाली आनुवांशिक बीमारियों से बचाव तथा टाइगर समूह में आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के उद्देश्य से टाइगर का विनिमय किया जा रहा है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली की अनुमति के बाद देहरादून जू से एक यलो टाइगर नर को ग्वालियर लाया गया है। इसके बदले गांधी प्राणी उद्यान ग्वालियर से एक व्हाइट टाइगर नर को देहरादून जू भेजा जाना प्रस्तावित है।
क्यूरेटर गौरव परिहार ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में गांधी प्राणी उद्यान में कुल 10 टाइगर, जिनमें 5 नर एवं 5 मादा शामिल हैं, संरक्षित हैं। टाइगर समूह में आनुवंशिक विविधता बनाए रखने तथा भविष्य में होने वाली आनुवांशिक बीमारियों की संभावनाओं को कम करने के लिए समय-समय पर टाइगर का विनिमय आवश्यक माना जाता है।
नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी के निर्देशानुसार गांधी प्राणी उद्यान से चिड़ियाघर प्रभारी डॉ. उपेन्द्र सिंह यादव, क्यूरेटर गौरव परिहार एवं जू-कीपर शिवकुमार पाल का दल देहरादून जू गया था। दल द्वारा वहां से नर टाइगर का व्यवहार एवं भौतिक परीक्षण कर उसे सुरक्षित रूप से ग्वालियर लाया गया है।
26 सितंबर 2026 को सुबह देहरादून जू से एक नर टाइगर को सुरक्षित रूप से गांधी प्राणी उद्यान ग्वालियर लाया गया। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार टाइगर को प्रारंभिक रूप से 7 से 10 दिनों तक क्वारंटाइन में रखा जाएगा। इस दौरान उसके स्वास्थ्य, व्यवहार एवं अनुकूलन की निगरानी की जाएगी। क्वारंटाइन अवधि पूर्ण होने के बाद टाइगर को पर्यटकों के दर्शन हेतु खुले बाड़े में लाए जाने की प्रक्रिया की जाएगी।
