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"नगर निगम ने अपनाया कड़ा रुख" ; नाली में गोबर बहाने वालों से वसूला 6250 रूपये का जुर्माना: निगम ने सीवर लाइनों के बार-बार जाम होने और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने की समस्या को गंभीरता से लिया

पशु डेयरी संचालकों द्वारा नालियों में गोबर बहाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कार्रवाई में नियमों का उल्लंघन करने वाले डेयरी संचालकों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाते हुए जुर्माना वसूला है

ग्वालियर। शहर में सीवर लाइनों के बार-बार जाम होने और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने की समस्या को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम ने कड़ा रुख अपनाया है। पशु डेयरी संचालकों द्वारा नालियों में गोबर बहाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी के सख्त निर्देशों पर स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले विभिन्न डेयरी संचालकों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाते हुए 6,250 रुपये का जुर्माना वसूल किया गया है।

मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि शहर के विभिन्न रिहायशी एवं व्यावसायिक इलाकों में पशुपालकों द्वारा बड़े पैमाने पर गाय एवं भैंसों का पालन किया जा रहा है। इन डेयरियों से निकलने वाले गोबर का उचित निस्तारण करने के बजाय कई डेयरी संचालक इसे सीधे शहर की नालियों और सीवर लाइनों में बहा रहे हैं। नालियों में गोबर बहाए जाने के कारण सीवर लाइनों में रुकावट पैदा हो रही है। इससे न केवल आम जनता को परेशानी का सामना करना पड रहा है। सीवर समस्या एवं गोबर से होने वाली गंदगी को लेकर नागरिकों की ओर से कई बार शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।

गोबर संग्रहण के लिए नगर निगम चला रहा है वाहन

मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी श्रीवास्तव ने आगे बताया कि नगर निगम प्रशासन द्वारा डेयरी व्यवसायियों की सुविधा और शहर को साफ-सुथरा रखने के उद्देश्य से गोबर के सही निस्तारण का पुख्ता प्रबंध किया गया है। शहर में संचालित होने वाली डेयरियों से निकलने वाले वेस्ट और गोबर को एकत्रित करने के लिए नगर निगम द्वारा विशेष गोबर संग्रहण वाहन चलाए जा रहे हैं। नगर निगम की ओर से समय-समय पर सभी डेयरी संचालकों को चेतावनी और निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि वे अपने पशुओं का गोबर नालियों में न बहाएं, बल्कि उसे नगर निगम के गोबर संग्रहण वाहनों में ही जमा कराएं। प्रशासन की ओर से बार-बार समझाया और सूचना दिए जाने के बावजूद कई डेयरी संचालक लगातार इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और गोबर को सीधे नाली में बहा रहे हैं।हैं।