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किशोर सशक्तिकरण की ‘‘उड़ान’’ कार्यशाला;13 से 18 वर्ष की आयु का समय आकांक्षाओं की उड़ान का समय होता है:- न्यायमूर्ति आनंद पाठक

कार्यशाला में वेलबीइंग शिक्षा की संस्थापक डाॅ.नीलम टण्डन ने छात्र-छात्राओं को वित्तीय प्रबंधन पर जानकारी प्रदान करते हुए छोटी-छोटी बचतों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया

ग्वालियर। 13 से 18 वर्ष की उम्र वह समय होता है जब हमारी आकांक्षाऐं बढ़ती हैं, इस उम्र में एक बच्चा सोचता है मुझे अब्दुल कलाम बनना है, एक बच्चा सोचता है मुझे एम.एस. धोनी बनना है, एक बच्ची सोचती है उसे पी.व्ही संधु बनना है, आईपीएस बनना है। ये समय व्यक्तित्व निर्माण का समय होता है, इस समय यदि आपको समुचित कैरियर काऊंसिंलिंग मिल जाए तो आप अपनी आकांक्षाओं की दिशाओं में सकारात्मक कदम उठा सकते हैं। यह विचार न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर में मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर द्वारा किशोर सशक्तिकरण के शीर्षक ‘‘उड़ान’’ पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में व्यक्त किये ।

 उल्लेखनीय है कि यह कार्यशाला न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधिपति, मप्र उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर की दूरदर्शी प्रेरणा एवं न्यायमूर्ति विवके रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति, मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर की सकारात्मक पहल के परिणामस्वरूप संपादित की गई ।

  न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने कक्षा 9 से 12 के नगर के विभिन्न शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को यह भी बताया कि सोशल ल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से हमारी एकाग्रता की क्षमता क्षीण होती है, न्यायमूर्ति पाठक ने बुलिंग को भी गलत व्यवहार बताया और कहा समाज द्वारा गलत कदम कभी भी प्रोत्साहित नहीं होते । हम सभी को अपने पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए वृक्षारोपण अनिवार्यतः करना चाहिए, हमें नई-नई किताबें पढ़ना चाहिए तथा साथ ही हमें जल संवर्धन के लिए अपने मोबाईल का डेटा समय-समय पर डिलीट करते रहना चाहिए, क्योंकि डेटा को संरक्षित रखने के लिए डेटा सेंटर द्वारा अत्यधिक मात्रा में जल का उपयोग किया जाता है । 

 कार्यक्रम में डाॅ.नीलम टण्डन वेलबीइंग शिक्षा की संस्थापक द्वारा छात्र-छात्राओं को वित्तीय प्रबंधन विषय पर जानकारी प्रदान करते हुए छोटी-छोटी बचतों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

उड़ान कार्यशाला में सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव द्वारा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्य और भूमिका के बारे में बताया। यूनीसेफ कंसल्टेंट अमरजीत सिंह द्वारा बाल सुरक्षा, पाक्सो अधिनियम से संबंधित जानकारियां प्रदान की गई। एडीशनल एसपी विदिता डागर ने छात्र-छात्राओं को डिजीटल सुरक्षा और साइबर बुलिंग इत्यादि विषय पर जानकारी प्रदान की ।

 डाॅ. धर्मेन्द्र रिछारिया ने बच्चों को भोजन, नींद, पानी, शारीरिक/मानसिक ऊर्जा संग्रहण आदि विषय पर जानकारी प्रदान की । प्रत्येक बच्चें को रोज करीब 2 लीटर पानी (20 गिलास) अवशय पीना चाहिए।

 न्यायमूर्ति आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति अमित सेठ, न्यायमूर्ति पुष्पेन्द्र यादव, न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत, न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता, उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ ग्वालियर के अध्यक्ष पवन पाठक, मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर की सदस्य सचिव कु. सुमन श्रीवास्तव, प्रधान जिला न्यायाधीश (निरीक्षण) ग्वालियर जाकिर हुसैन, एसटीएटी के चेयरमेन शिवकान्त, प्रिंसिपल रजिस्ट्रार राजीव के. पाल, ओएसडी/रजिस्ट्रार नवीन कुमार शर्मा, उपसचिव मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर अनिरूद्ध जैन, सदस्य राज्य मप्र अधिवक्ता परिषद जयप्रकाश मिश्रा, अतिरिक्त महाधिवक्तागण राजेश शुक्ला, दीपेन्द्र सिंह कुशवाह, रोहित मिश्रा और बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक सम्मिलित हुए।हुए।