ग्वालियर। शासकीय अभिलेखों में षड्यंत्रपूर्वक हेराफेरी करने, राजस्व अभिलेखों एवं खसरा पंजी को फाड़कर नष्ट करने तथा कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण में शासन के हितों के विपरीत कार्य करने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर रिकॉर्ड रूम में पदस्थ सहायक वर्ग-3 सतपाल कुशवाह, भृत्य वीरेन्द्र कुशवाह तथा आरोपी वादी धर्मवीर के विरुद्ध विश्वविद्यालय थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण (एफआईआर) दर्ज कराए गए हैं। इस मामले में ग्वालियर ग्रामीण तहसील के पटवारी कुलदीप चाहर को पूर्व में ही निलंबित किया जा चुका है।
अपर कलेक्टर कुमार सत्यम ने बताया कि ग्राम महू की भूमि से संबंधित एक दीवानी प्रकरण व्यवहार न्यायालय में विचाराधीन है। जिला प्रशासन के संज्ञान में आया था कि संबंधित पटवारी एवं रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों द्वारा शासन के हितों के प्रतिकूल कार्य करते हुए वादी पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कराई।
जांच में पाया गया कि कोर्ट में शासन की ओर से साक्षी के रूप में उपस्थित पटवारी कुलदीप चाहर ने मूल राजस्व अभिलेखों का मिलान किए बिना वादी धर्मवीर द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को स्वीकार किया। साथ ही प्रभारी अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए शासकीय अभिलेखों को कोर्ट के समक्ष समुचित रूप से प्रस्तुत नहीं किया। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए पटवारी कुलदीप चाहर को निलंबित किया गया।
अपर कलेक्टर ने बताया कि विस्तृत जांच में यह भी सामने आया कि वादी धर्मवीर से मिलीभगत कर रिकॉर्ड रूम में पदस्थ सहायक वर्ग-3 सतपाल कुशवाह एवं भृत्य वीरेन्द्र कुशवाह द्वारा शासकीय अभिलेखों में हेराफेरी करने तथा महत्वपूर्ण अभिलेखों को नष्ट करने का प्रयास किया गया। इस गंभीर अनियमितता को दृष्टिगत रखते हुए दोनों कर्मचारियों एवं आरोपी वादी धर्मवीर के विरुद्ध विश्वविद्यालय थाना में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शासकीय अभिलेखों से छेड़छाड़ तथा शासन के हितों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की अनियमितता या कदाचार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों के विरुद्ध विधि संवत कठोर कार्रवाई की जायेगी।
