ग्वालियर जिला प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई ई-विकास प्रणाली अर्थात ई-टोकन से खाद (रासायनिक उर्वरक) वितरण करने वाले अग्रणी जिलों में शुमार है। जिले में इसी व्यवस्था के तहत खाद वितरित किया जा रहा है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने किसान भाईयों से अपील की है कि वे जितना जरूरत हो उतना ही खाद ई-टोकन के आधार पर प्राप्त करें। यदि किसी किसान ने आवश्यकता से अधिक खाद का उठाव किया तो खरीफ मौसम में मिलने वाले कोटे में से उसकी उतनी खाद की बोरी कम हो जायेंगीं, जितनी बोरी 01 मार्च के बाद अनावश्यक रूप से ली गई हैं।
ऑनलाइन पोर्टल पर किसान की जमीन, बोई गई फसल व खाद की आवश्यकता का सम्पूर्ण ब्यौरा दर्ज रहता है। किसानों को आश्वस्त किया गया है कि शासन द्वारा खरीफ मौसम में भी खाद की पर्याप्त व्यवस्था की जायेगी। जिन किसान भाईयों से ई-विकास पोर्टल पर अभी तक पंजीयन नहीं कराया है, उन सभी से जल्द से जल्द पंजीयन कराकर खाद वितरण की आसान सुविधा प्राप्त करने की अपील भी की गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने कृषि, सहकारिता व विपणन संघ के अधिकारियों सहित जिले के सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि जिले के कृषकों को नई व्यवस्था की जानकारी दें। साथ ही उन्हें ई-टोकन प्रणाली से खाद लेने के लिये प्रोत्साहित करें।
आसान है “ई-विकास पोर्टल” पर पंजीयन कराना
ई-विकास पोर्टल पर पंजीयन कराना अत्यंत आसान है। इस पोर्टल पर किसान भाई जैसे ही अपना आधार नम्बर दर्ज कराते हैं वैसे ही लिंक मोबाइल नम्बर पर ओटीपी प्राप्त होता है। ओटीपी सत्यापित होते ही किसान का ऑनलाइन पंजीयन पूर्ण हो जाता है। पंजीयन के बाद किसान भाई ई-टोकन प्राप्त कर उर्वरक ले सकते हैं। पोर्टल पर किसान की भूमि संबंधी जानकारी एग्री स्टेक सिस्टम से प्राप्त हो जाती है। पोर्टल पर किसान के नाम दर्ज खसरा नम्बर व भूमि का विवरण भी उपलब्ध रहता है। उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास रणवीर सिंह जाटव ने बताया कि ई-टोकन में किसान का नाम, पंजीयन क्रमांक, उर्वरक का प्रकार व मात्रा, वितरण केन्द्र एवं निर्धारित तिथि व समय अंकित रहता है। यह टोकन एसएमएस, मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। ई-टोकन के आधार पर जिले के किसान निर्धारित समय पर किसी भी वितरण केन्द्र से उर्वरक प्राप्त कर रहे हैं।हैं।
