ग्वालियर अंचल में आलू उत्पादन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। पंजाबीपुरा-बेहटा मुरार में 17 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित आलू टिश्यू कल्चर एवं एरोपोनिक लैब के निर्माण में आ रही बाधा दूर हो गई है।
कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर सोमवार को राजस्व विभाग की टीम ने लैब के लिए आवंटित 14 हेक्टेयर भूमि से मशीनों की मदद से अतिक्रमण हटवा दिया गया है। एसडीएम नरेश गुप्ता के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद संबंधित ठेकेदार को 15 दिन के भीतर शेष बाउंड्रीवॉल का निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सहायक संचालक उद्यानिकी एमपीएस बुंदेला ने बताया कि इस लैब की स्थापना से ग्वालियर संभाग के हजारों आलू उत्पादक किसानों को बीमारी रहित और उच्च गुणवत्ता वाली उन्नत प्रजातियों का बीज उपलब्ध हो सकेगा। वर्तमान में मध्यप्रदेश के किसानों को उन्नत आलू बीज के लिए पंजाब पर निर्भर रहना पड़ता है। लैब शुरू होने से इस निर्भरता में कमी आएगी और किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बीज मिल सकेगा।
उन्होंने बताया कि टिश्यू कल्चर एवं एरोपोनिक तकनीक से तैयार आलू बीज की उत्पादन क्षमता पारंपरिक बीज की तुलना में कई गुना अधिक है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में एरोपोनिक तकनीक से आलू उत्पादन का सफल परीक्षण किया गया है। पिछले वर्ष किए गए परीक्षण में एक किलोग्राम बीज से लगभग 250 से 400 kg आलू का उत्पादन प्राप्त हुआ था। यह तकनीक आलू उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखती है।
उद्यानिकी विभाग के माध्यम से राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के तहत जिला प्रशासन ने इस परियोजना के लिए 14 हेक्टेयर भूमि आवंटित की थी। अब अतिक्रमण हटने के बाद लैब निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह परियोजना जिले सहित पूरे ग्वालियर संभाग के आलू उत्पादक किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी।
