ग्वालियर। शासन हित से जुड़े न्यायालयीन प्रकरण में पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं शासकीय आचरण नियमों का उल्लंघन पटवारी कुलदीप चाहर को भारी पड़ा है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने ग्वालियर ग्रामीण तहसील के पटवारी कुलदीप चाहर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पटवारी के खिलाफ विभागीय जांच प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार व्यवहार न्यायालय में विचाराधीन एक दीवानी प्रकरण में पटवारी कुलदीप चाहर शासन की ओर से साक्षी के रूप में उपस्थित हुए थे। आरोप है कि उन्होंने मूल राजस्व अभिलेखों का मिलान किए बिना वादी पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को स्वीकार किया तथा प्रभारी अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों का कोर्ट के समक्ष समुचित रूप से प्रस्तुतिकरण नहीं किया। इस कारण शासन के हित प्रभावित होने की संभावना उत्पन्न हुई।
मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ग्वालियर सिटी के प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित पटवारी को कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया था। प्रस्तुत जवाब का परीक्षण किए जाने पर उसे असंतोषजनक एवं अस्पष्ट पाए जाने के बाद कलेक्टर ने यह कार्रवाई की।
जारी आदेश में कहा गया है कि संबंधित पटवारी का आचरण शासकीय सेवक के अपेक्षित दायित्वों, निष्ठा एवं ईमानदारी के विपरीत पाया गया है, जो मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों का उल्लंघन है। इसी आधार पर उन्हें नियम-9 के तहत निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि में पटवारी कुलदीप चाहर का मुख्यालय कार्यालय तहसीलदार, तहसील डबरा निर्धारित किया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ग्वालियर सिटी को निर्देश दिए हैं कि संबंधित प्रकरण से जुड़े अभिलेख एवं आरोप-पत्र सात दिवस के भीतर प्रस्तुत किए जाएँ, ताकि विभागीय जांच की कार्रवाई नियमानुसार प्रारंभ की जा सके।
