ग्वालियर। जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा परंपरागत कृषि विकास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई है। उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास कार्यालय द्वारा सेंटर फॉर एग्री बिजनेस इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप, ग्वालियर में आयोजित इस कार्यशाला में जिले में संचालित जैविक खेती कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही क्लस्टर स्तर पर कार्यरत स्टाफ के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें तकनीकी, वित्तीय एवं विपणन संबंधी विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। किसान कल्याण वर्ष के उपलक्ष्य में हो रहे कार्यक्रमों की कड़ी में आयोजित की गई इस कार्यशाला का गुरुवार को समापन हुआ। कार्यशाला में परंपरागत कृषि विकास योजना अंतर्गत जिले में गठित क्लस्टरों की प्रगति, कार्ययोजना तथा फील्ड स्तर पर आ रही समस्याओं पर चर्चा की गई और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
सर्विस प्रोवाइडर संस्था ने योजना के तहत उपलब्ध कराए जा रहे तकनीकी, वित्तीय एवं मार्केटिंग सहयोग की जानकारी दी, वहीं चेतना विकास स्वराज संगठन द्वारा ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया समझाई गई। कृषि विज्ञान केंद्र, ग्वालियर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एसएस कुशवाह तथा वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एससी श्रीवास्तव ने जैविक खेती की उन्नत तकनीकों एवं जीवामृत, बीजामृत व घन जीवामृत बनाने की विधि बताई। कार्यशाला के प्रथम दिवस पर राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलसचिव डॉ. अजय कौशल तथा द्वितीय दिवस पर सहायक संचालक कृषि अवधेश शर्मा ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। कार्यशाला में विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों, क्लस्टर स्टाफ सहित अन्य हितधारकों के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास, ग्वालियर ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत एससी विद्यार्थियों के लिए कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में उद्यमिता प्रशिक्षण शुरू
ग्वालियर जिले में भी किसान कल्याण वर्ष के उपलक्ष्य में उन्न्त कृषि को बढ़ावा देने के लिए विविध प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसी क्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, ग्वालियर द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए तीन दिवसीय उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह कार्यक्रम राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में आयोजित हो रहा है।
यह प्रशिक्षण पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों के निर्माण एवं खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्यमिता पर केन्द्रित है। ज्ञात हो राज्य शासन द्वारा वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. अजय कौशल ने कहा कि युवा शासन की योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार स्थापित कर सकते हैं। आज स्वास्थ्यवर्धक और कम शर्करा व तेल वाले खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे इस क्षेत्र में उद्यमिता की अच्छी संभावनाएँ हैं। तकनीकी सत्र में निदेशक विस्तार सेवाएँ डॉ. वायपी सिंह ने जैविक एवं संरक्षित खेती की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र सिंह कुशवाह ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में स्वरोजगार के अवसरों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. अमिता शर्मा ने सहजन के औषधीय महत्व की जानकारी दी। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. रीता मिश्रा ने फोर्टिफाइड एवं बायोफोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के निर्माण से जुड़े उद्यमिता अवसरों पर जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजीव सिंह चौहान ने किया।
