ग्वालियर। सहकारिता विभाग ने शहरी साख संस्थाओं के सदस्यों को आगाह किया है कि वे लुभावनी जमा योजनाओं के प्रलोभन में आकर अपनी राशि जमा न करें और न ही कलेक्शन एजेंटों के माध्यम से धनराशि जमा करवाएं।
उपायुक्त सहकारिता ने सदस्यों को सचेत करते हुए कहा है कि किसी भी शहरी साख संस्था में अपनी जोखिम पर ही राशि जमा करें तथा संस्था की कार्यप्रणाली और नियमों की पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही कोई वित्तीय निर्णय लें। उपायुक्त सहकारिता ने बताया कि जिले में शहरी साख संस्थाओं द्वारा आकर्षक योजनाओं का प्रलोभन देकर सीधे अथवा कलेक्शन एजेंटों के माध्यम से सदस्यों से राशि जमा कराने और परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद भी जमाकर्ताओं को उनकी राशि वापस नहीं करने जैसी शिकायतें एवं धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं।
ऐसी गतिविधियां जमाकर्ताओं के हितों के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न करती हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 के अंतर्गत पंजीकृत शहरी साख संस्थाएं अपने सदस्यों से अमानत राशि प्राप्त कर पंजीकृत उपविधियों में निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप ऋण एवं अमानत संबंधी कार्य करती हैं। इन संस्थाओं को बैंकिंग संबंधी कार्य करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके बावजूद कुछ संस्थाओं द्वारा बैंकिंग विनियमन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन कर बैंकिंग गतिविधियां संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है। उपायुक्त सहकारिता ने स्पष्ट किया कि आमजन में यह धारणा रहती है कि शहरी साख संस्थाएं पंजीयक सहकारी संस्थाएं के प्रत्यक्ष प्रशासकीय नियंत्रण में कार्य करती हैं, जबकि वास्तविकता में ये संस्थाएं अपने सदस्यों एवं आमसभा के प्रति उत्तरदायी होती हैं।
संस्थाओं के दैनिक व्यवसाय, जमा राशि स्वीकार करने तथा ऋण वितरण जैसे कार्यों में पंजीयक का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं होता है। उन्होंने सदस्यों एवं जमाकर्ताओं को सलाह दी है कि वे किसी भी संस्था की आकर्षक ब्याज दरों अथवा अन्य लोक-लुभावन योजनाओं से प्रभावित होकर अपनी जमा पूंजी जोखिम में न डालें। यदि किसी संस्था द्वारा जमा राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो इसके लिए संयुक्त पंजीयक, उप पंजीयक अथवा सहायक पंजीयक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकेगा। अतः सदस्य पूरी सावधानी बरतें और कलेक्शन एजेंटों के माध्यम से किसी भी प्रकार की राशि जमा करने से बचें।बचें।
