ग्वालियर जिले में मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 4 हजार मैट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। जिले में सरकार द्वारा मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग के माध्यम से संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत मछली पालन से जुड़े लोगों को विशेष प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। जिले में पिछले साल 3 हजार 62 मैट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ था।
मत्स्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार मौजूदा वित्तीय वर्ष में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिये ग्वालियर जिले के हरसी व ककैटो जलाशय में 1500 केज स्थापित कराने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें से हरसी जलाशय के 1502 हैक्टेयर जल क्षेत्र में 500 केज व ककैटो जलाशय के 472 हैक्टेयर जल क्षेत्र में एक हजार केज स्थापित कराए जायेंगे।जायेंगे।
क्या होती है उन्नत मत्स्य पालन की ‘केज विधि’
बता दें कि उन्नत मत्स्य पालन के लिये केज विधि अपनाई जाती है। केज से आशय जालीदार पिंजरे या संरचना से है, जिसे जलाशयों व नदियों इत्यादि में स्थापित कर मछली पालन किया जाता है। मछलियों को केज के अंदर प्राकृतिक जल प्रवाह के बीच रखा जाता है। साथ ही उन्हें नियमित रूप से संतुलित आहार दिया जाता है। इस विधि से कम लागत में अधिक मत्स्य उत्पादन प्राप्त होता है। इस विधि से मछली पालन से मछलियों की वृद्धि तेजी से होती है।
ग्वालियर जिले में मत्स्य बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये मौजूदा वित्तीय वर्ष में 270 लाख स्टैंडर्ड फ्राई मत्स्य बीज उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल जिले में 149 स्टैंडर्ड फ्राई मत्स्य बीज का उत्पादन हुआ था।
जिले में मछुआ समृद्धि योजना के तहत स्मार्ट फिश पार्लर निर्माण के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
