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किसान पंजीयन सत्यापन में लापरवाही पर तहसीलदार बानमौर एवं जौरा को कारण बताओ नोटिस, गंभीर लापरवाही के चलते संबंधित पटवारियों को निलंबित किया जा चुका है

किसान पंजीयन के दिशा-निर्देशों के विपरीत बानमौर तहसील के तीन तथा जौरा तहसील के 12 पटवारियों ने त्रुटिपूर्ण सत्यापन प्रतिवेदन प्रस्तुत किए हैं, शासन की छवि भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई है

ग्वालियर। मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए किसान पंजीयन सत्यापन कार्य में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर प्रभारी तहसीलदार बानमौर कल्पना कुशवाह तथा प्रभारी तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार जौरा बालकृष्ण मिश्रा को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है।

अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मुरैना एवं जौरा द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार शासन द्वारा जारी किसान पंजीयन संबंधी दिशा-निर्देशों के विपरीत बानमौर तहसील के तीन तथा जौरा तहसील के 12 पटवारियों द्वारा त्रुटिपूर्ण सत्यापन प्रतिवेदन प्रस्तुत किए गए। जांच में पाया गया कि जिन सर्वे नंबरों पर संबंधित किसानों का पंजीयन सत्यापित किया, उन भूमि अभिलेखों में संबंधित किसानों का स्वामित्व दर्ज ही नहीं था। इस गंभीर लापरवाही के चलते संबंधित पटवारियों को निलंबित किया जा चुका है।

प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि प्रभारी तहसीलदारों द्वारा पटवारियों के प्रतिवेदन पर ही विश्वास करते हुए भूमिस्वामी, खसरा एवं अन्य राजस्व अभिलेखों का समुचित परीक्षण किए बिना किसान पंजीयन का सत्यापन कर दिया गया। इससे शासन की महत्वपूर्ण समर्थन मूल्य गेहूं उपार्जन योजना प्रभावित हुई तथा समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के कारण शासन की छवि भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई।

मुरैना कलेक्टर जांगिड़ ने इस कृत्य को पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही, किसानों के प्रति असंवेदनशीलता तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम,1965 के नियम- 3 के उपनियम (1), (2) एवं (3) का उल्लंघन माना है। दोनों अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सूचना पत्र प्राप्त होने के तीन दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें कि उनके विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। निर्धारित अवधि में उत्तर प्राप्त नहीं होने की स्थिति में नियमानुसार एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।