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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस विशेष ; सिंगापुर में योग का परचम लहरा रहे हैं ग्वालियर के मनोज ठाकुर, पिछले 25 वर्षों में उन्होंने 5,000 से अधिक योग शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है

एशिया के कई देशों में भारतीय योग की पताका फहरा रहे हैं मनोज, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उनकी उपलब्धियाँ न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं

योग मास्टर ठाकुर ने व्यासा योग सिंगापुर की स्थापना कर योग शिक्षा एवं योग चिकित्सा के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए, उन्होंने सिंगापुर में रहकर भारतीय योग की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाने में योगदान उल्लेखनीय माना जाता है

ग्वालियर। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर ग्वालियर के लिए गर्व का विषय है कि शहर के सुपुत्र मनोज ठाकुर आज सिंगापुर सहित एशिया के अनेक देशों में भारतीय योग की पताका फहरा रहे हैं।

मनोज ठाकुर ने ग्वालियर स्थित विवेकानंद नीडम में योगाचार्य  अनिल सरोदे के मार्गदर्शन में योग की शिक्षा प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने योग में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2003 में सिंगापुर जाकर योग के प्रचार-प्रसार का कार्य प्रारंभ किया। वहाँ उन्होंने व्यासा योग सिंगापुर (VYASA Yoga Singapore) की स्थापना कर योग शिक्षा एवं योग चिकित्सा के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए।

पिछले 25 वर्षों में उन्होंने 5,000 से अधिक योग शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है। उनके द्वारा प्रशिक्षित योग शिक्षक आज सिंगापुर, मलेशिया, वियतनाम, जापान, दक्षिण कोरिया तथा यूरोप के विभिन्न देशों में योग का ज्ञान प्रदान कर रहे हैं।

मनोज ठाकुर को योग शिक्षा, योग चिकित्सा, योग शिक्षक प्रशिक्षण तथा अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलनों एवं आयोजनों के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्ष 2016 से वे एशियन पैसिफिक योग थेरेपी एसोसिएशन (APYTA) के निदेशक एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वयक के रूप में भी सेवाएँ दे रहे हैं।

उन्होंने भारत एवं विदेशों में अनेक अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन, योग चिकित्सा सेमिनार तथा बड़े योग आयोजनों का सफलतापूर्वक संचालन एवं समन्वय किया है। उनके प्रमुख आयोजन सिंगापुर, जापान, वियतनाम, बाली, बेंगलुरु, दिल्ली और ऋषिकेश जैसे स्थानों पर आयोजित हुए हैं।

सिंगापुर में रहकर भारतीय योग की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाने में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उनकी उपलब्धियाँ न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।