ग्वालियर/मुरैना। ग्रामीण क्षेत्रों में मधुमेह (डायबिटीज) एवं उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जैसी गैर-संचारी बीमारियों की समय पर पहचान, रोकथाम और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर सभागार, मुरैना में सुहास परियोजना के अंतर्गत एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में स्वास्थ्य। विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़े प्रतिनिधियों को परियोजना की रूपरेखा एवं कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई।
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आरएस. जुलानिया ने सुहास परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह परियोजना मध्यप्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से संचालित की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को स्वास्थय जागरूकता से जोड़कर उन्हें समुदाय में स्वास्थय ज्ञान मध्यस्थ के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थय सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी तथा लोगों को समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एवं जनस्वास्थय विशेषज्ञ डॉ. मनोहर अगनानी ने कहा कि वर्तमान में डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। इसका एक प्रमुख कारण जोखिम वाले लोगों की समय पर स्क्रीनिंग एवं जांच नहीं हो पाना है। उन्होंने कहा कि इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए समुदाय आधारित प्रयासों की आवश्यकता है। घर-घर पहुंचकर लोगों को जागरूक करने, नियमित जांच कराने तथा समय पर उपचार उपलब्ध कराने से इन रोगों के दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया प्रथम चरण पर 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की आबादी इस अभियान का प्रमुख लक्ष्य होगी।
समूहों की महिलाओं को “आरोग्य सखी” के रूप में प्रशिक्षित किया जायेगा
डॉ. अगनानी ने बताया कि सुहास कार्यक्रम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को “आरोग्य सखी” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। ये आरोग्य सखियां गांव-गांव और घर-घर जाकर 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की जानकारी एकत्र करेंगी तथा उन्हें डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के प्रति जागरूक करेंगी। इसके लिए एक मोबाइल एप का उपयोग किया जाएगा, जिसके माध्यम से संभावित जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनकी जानकारी दर्ज की जाएगी। कार्यक्रम के तहत सबसे पहले लक्षित आबादी की लाइन लिस्टिंग की जाएगी, इसके बाद परिवारवार जानकारी संकलित कर फैमिली फोल्डर तैयार किए जाएंगे तथा जोखिम वाले व्यक्तियों का स्वास्थय आकलन कर उन्हें उपचार से जोड़ा जाएगा।
कार्यशाला में कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा कि गैर-संचारी बीमारियां वर्तमान समय की एक गंभीर स्वास्थय चुनौती हैं, जिनकी रोकथाम के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंच बनाकर लोगों को स्वास्थय के प्रति जागरूक किया जा सकता है। कलेक्टर ने स्वास्थय विभाग एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने तथा आवश्यकता अनुसार जागरूकता एवं स्वास्थय शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए।
कार्यशाला में सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. एमके अग्रवाल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कमलेश कुमार भार्गव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थय अधिकारी डॉ. पदमेश उपाध्याय, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से दिनेश तोमर, सीडीपीओ पोरसा सहित जिला चिकित्सालय के चिकित्सक, सामुदायिक स्वास्थय अधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।रहे।
