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जल गंगा संवर्धन अभियान; एसएएफ द्वितीय वाहिनी में प्रभारी मंत्री ने पूजन कर पुनर्जीवित बावड़ियों का किया लोकार्पण, शहर की अन्य बावड़ियों के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव तैयार करने निगम आयुक्त को दिए निर्देश

स्मार्ट सिटी ने संरक्षण कार्यों के साथ बावड़ियों का सौंदर्यीकरण भी किया गया है, बावड़ियों की बाउंड्रीवॉल और अंदरूनी हिस्सों में आकर्षक पेंटिंग कर उन्हें नया स्वरूप दिया है

ग्वालियर। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत स्मार्ट सिटी द्वारा तीन ऐतिहासिक बावड़ियों को वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली के माध्यम से पुनर्जीवित किया गया है। एसएएफ द्वितीय वाहिनी परिसर स्थित बावड़ी का प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, नगर निगम सभापति मनोज तोमर एवं नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने विधिवत पूजन-अर्चन कर लोकार्पण किया।

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय को शहर की अन्य बावड़ियों के जीर्णोद्धार एवं संरक्षण के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

स्मार्ट सिटी द्वारा एसएएफ द्वितीय वाहिनी परिसर में स्थित स्टेटकालीन बावड़ी, कांचमील स्थित सेनापति हनुमान मंदिर परिसर की बावड़ी तथा इटालियन गार्डन की बावड़ी का संरक्षण एवं पुनर्जीवन कार्य किया गया है।

तीनों बावड़ियों के संरक्षण के तहत सबसे पहले उनके अंदर जमा कचरा एवं गाद को हटाया गया। इसके बाद टूटे एवं क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कर संरचनात्मक रूप से उन्हें मजबूत बनाया गया। साथ ही वर्षा जल के शुद्धिकरण के लिए प्रत्येक बावड़ी के पास वाटर हार्वेस्टिंग किट स्थापित की गई है। इस प्रणाली के माध्यम से फिल्टर किया गया वर्षा जल सीधे बावड़ियों में पहुंचेगा, जिससे भूजल स्तर में वृद्धि होगी।

97 लाख रुपये की लागत से हुआ कार्य

तीनों बावड़ियों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन कार्य पर लगभग 97 लाख रुपये की लागत आई है। इस राशि में मरम्मत, वाटर हार्वेस्टिंग किट की स्थापना, रंग-रोगन एवं सौंदर्यीकरण जैसे कार्य शामिल हैं।

हर वर्ष लाखों लीटर वर्षा जल होगा संरक्षित

एसएएफ द्वितीय वाहिनी परिसर में अस्तबल की छत और आसपास के मैदान का वर्षा जल बावड़ी तक पहुंचाया जाएगा। इससे प्रतिवर्ष लगभग 22 से 23 लाख लीटर पानी संरक्षित होगा। इसी प्रकार इटालियन गार्डन स्थित बावड़ी में हर वर्ष लगभग 5 से 6 लाख लीटर वर्षा जल का संरक्षण होगा।

वहीं, सेनापति हनुमान मंदिर परिसर का क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण मैदान का समतलीकरण कर वर्षाजल को बावड़ी तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 22 से 25 लाख लीटर पानी संरक्षित किया जा सकेगा।

पेंटिंग और सौंदर्यीकरण से बढ़ी बावड़ियों की आकर्षकता

स्मार्ट सिटी द्वारा संरक्षण कार्यों के साथ-साथ बावड़ियों का सौंदर्यीकरण भी किया गया है। बावड़ियों की बाउंड्री वॉल और अंदरूनी हिस्सों में आकर्षक पेंटिंग कर उन्हें नया स्वरूप दिया गया है, जिससे ये स्थल अब अधिक सुंदर और दर्शनीय बन गए हैं।