'दक्ष' ने नेपाल में आयोजित प्रतिष्ठित "सागरमाथा कप 2026" में स्वर्ण पदक जीतकर मुरैना जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है, कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने सब जूनियर वर्ग की प्योर क्लासिकल श्रेणी में अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से निर्णायकों को सराहना करने पर मजबूर कर दिया और स्वर्ण पदक हासिल किया
ग्वालियर। मुरैना जिले के लिए गर्व और खुशी का विषय है कि जिले के भावी शास्त्रीय नृत्य कलाकार दक्ष श्रीवास्तव ने नेपाल में आयोजित प्रतिष्ठित सागरमाथा कप 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर मुरैना का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। इसी माह 7 जून को आयोजित इस प्रतियोगिता में विभिन्न देशों एवं राज्यों के प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच दक्ष श्रीवास्तव ने 10 से 13 वर्ष आयु वर्ग की प्योर क्लासिकल श्रेणी में अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण का शानदार परिणाम
दक्ष श्रीवास्तव बचपन से ही भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति विशेष रुचि रखते हैं। निरंतर अभ्यास, अनुशासन और अपने गुरुजनों के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी कला को निखारा है। सागरमाथा कप जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों और निर्णायकों का मन मोह लिया। नृत्य के दौरान उनकी भाव-भंगिमाएं, लय-ताल पर मजबूत पकड़ और मंच पर आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति उनकी मेहनत और समर्पण को स्पष्ट रूप से दर्शाती थी। निर्णायक मंडल ने उनकी कला की सराहना करते हुए उन्हें स्वर्ण पदक के लिए चयनित किया।
मुरैना जिले में खुशी की लहर
दक्ष की इस उपलब्धि के बाद मुरैना जिले में खुशी का माहौल है। परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, गुरुजनों तथा कला प्रेमियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दक्ष की सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि छोटे शहरों और जिलों के बच्चे भी अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उनकी इस उपलब्धि से जिले के अन्य बच्चों और युवाओं को भी कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
'दक्ष' ने भारतीय संस्कृति का मान बढ़ाया है
सागरमाथा कप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय शास्त्रीय नृत्य का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर दक्ष श्रीवास्तव ने न केवल मुरैना बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान बढ़ाया है। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि भारतीय शास्त्रीय कलाएं आज भी विश्व मंच पर अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं। दक्ष की सफलता युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी।
सफलता का श्रेय गुरुजनों और माता-पिता को दिया
दक्ष श्रीवास्तव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और निरंतर अभ्यास को दिया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए एक नई शुरुआत है और भविष्य में भी वे और अधिक मेहनत करके राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने का प्रयास करेंगे। उनकी यह सफलता मुरैना जिले के लिए गौरव का विषय है और आने वाले वर्षों में उनसे और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है।है।
