ग्वालियर। मुरार विकासखंड के सिरसौद गांव में रतनजोत का फल, ड्राई-फ्रूट समझकर खाने से बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। रविवार को शाम करीब एक दर्जन बच्चे फल खाने के बाद उल्टी-दस्त की शिकायत से परेशान हुए। इनमें से 10 बच्चों को जिला अस्पताल मुरार में इलाज के लिए परिजन लेकर पहुँचे तो
वहां से उन्हें उन्हें बिना प्राथमिक उपचार के ही जयारोग्य अस्पताल (JAH) समूह के कमला राजा अस्पताल (KRH) रेफर कर दिया गया। जहां बच्चों को भर्ती कराया गया, यहाँ 3 बच्चों को आईसीयू में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार रतनजोत का फल जहरीला होता है और इसके सेवन से उल्टी-दस्त व डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। गांव से तीन और बच्चों को अस्पताल लाए जाने की जानकारी है।
जानकारी के अनुसार मुरार के सिरसौद गांव में रविवार को भागवत कथा और भंडारा खाकर लौट रहे करीब एक दर्जन से अधिक बच्चे रतनजोत का फल (बीज) खाने से बीमार हो गए। बच्चों ने इसे ड्राई फ्रूट समझकर फल खाया था। घर पहुंचते ही कई बच्चों को उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने लगी । जिनमें से 13 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, इनमें 14 साल से बड़े दो बच्चों को जेएएच के आईसीयू और केआरएच के पीआईसीयू में 3 बच्चों सहित 10 भर्ती हैं। शेष बच्चों की हालत में सुधार देख हस्थिनापुर थाना पुलिस ने उन्हें घर भेज दिया है।
सिरसौद निवासी हरिओम (15) और सेजल (14) की गंभीर स्थिति दिखते हुए न्यू जेएएच के आईसीयू में शिफ्ट किया गया है, जबकि पूजा (11), आरती (9), दिक्षा (12), प्रवीण (10), दिव्या (8), सुमित (8), गौरव (5), तनु (9) आदि सहित 3 बच्चे और केआरएच में भर्ती हैं।
जिला अस्पताल से बिना प्राथमिक उपचार जेएएच रेफर ; परिजनों का आरोप जमीन पर तड़पते रहे बच्चे, स्ट्रेचर भी नहीं मिला
मामले में जिला अस्पताल मुरार के डॉक्टरों की लापरवाही भी सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि तड़पते बच्चों को लेकर अस्पताल के इमरजेंसी रूम पहुंचे तो वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार दिए बिना ही रतनजोत का फल सुनकर केआरएच रेफर कर दिया गया। यहां बच्चों को स्ट्रेचर तक नहीं मिला, जिसके कारण बच्चों को मजबूरन जमीन पर लेटाना पड़ा। बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ. घनश्याम दास पहले केआरएच पहुंचे और बच्चों का चेकअप किया। डॉ. दास बाद में खुद जिला अस्पताल मुरार भी गए l
रतनजोत पौधे का फल जहरीला, बच्चों को खाने से रोकें
जीआर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर और वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ. घनश्याम दास का कहना है कि रतनजोत का फल जहरीला होता है। इसे खाने से शरीर में टॉक्सिसिटी फैलती , जिससे उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन की शिकायत होती है। बच्चों का इलाज प्राथमिकता से किया जा रहा है। गमीण इलाकों में परिजनों को अनजान पेड़-पौधों के फल खाने से बच्चों को रोकना चाहिए।
