राजनीति

“मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान”; अमरौल में लगा जिला स्तरीय जन-विश्वास शिविर, जन-विश्वास मजबूत करने गाँव-गाँव पुहँचा प्रशासन, उद्यमी संवाद ने युवाओं को दिखाई आत्मनिर्भरता की राह

सीएम हैल्पलाइन की 1819 शिकायतों का निराकरण, शिविर में सुनी गईं 155 से अधिक लोगों की समस्याएँ, अधिकांश का हुआ समाधान, क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायतों से आए नागरिकों से सीधे संवाद में उनकी समस्याएँ, अपेक्षाएँ और चुनौतियाँ जानीं

ग्वालियर। मुख्यमंत्री की पहल पर चल रहे “मुख्यमंत्री जन- विश्वास अभियान” के तहत शुक्रवार को ग्वालियर जिले का तीसरा जिला स्तरीय जन-विश्वास शिविर ग्राम अमरौल में आयोजित हुआ। जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी गाँव-गाँव पहुँचे, शासकीय संस्थाओं का निरीक्षण किया और अमरौल शिविर में क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायतों से आए नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएँ, अपेक्षाएँ और चुनौतियाँ जानीं। शिविर के माध्यम से सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज 1819 शिकायतों का निराकरण किया गया, जबकि शिविर में 155 से अधिक लोगों की समस्याएँ सुनी गईं और लगभग 75 मामलों का मौके पर ही समाधान किया। शेष समस्याओं को पोर्टल पर दर्ज कर समयबद्ध निराकरण के लिए भेजा गया। इस दौरान हितलाभ वितरण, उद्यमियों से प्रेरक संवाद और नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित हुआ। क्षेत्रीय विधायक मोहन सिंह राठौर की मौजूदगी में आयोजित शिविर में कलेक्टर रुचिका चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह, एसडीएम भितरवार सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने मौके पर ही अनेक समस्याओं का समाधान कर नागरिकों को यह भरोसा दिलाया कि शासन की योजनाओं का लाभ और प्रशासन की सेवाएँ गाँव की चौखट तक पहुँचेंगी। विधायक राठौर ने शिविर में मौजूद ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि आप सबकी एक-एक समस्या का समाधान होगा। जो समस्यायें शिविर में तकनीकी कारणों से शेष रह गई हैं, उन सभी को सीएम हैल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज किया गया है। आवेदन पर दिए मोबाइल फोन नम्बर पर ओटीपी आयेगी और जब आप संतुष्ट होकर ओटीपी बतायेंगे तभी आपकी समस्या बंद होगी।होगी।

बच्चों ने हल किए कठिन सवाल और कलेक्टर ने पढ़ाया दिशाओं का पाठ

जन-विश्वास अभियान के तहत कलेक्टर रुचिका चौहान सहित जिला स्तरीय अधिकारियों ने भितरवार विकासखंड के विभिन्न गाँवों का भ्रमण कर शासकीय संस्थाओं की स्थिति देखी। ग्राम जुझारपुर के शासकीय प्रावि में कक्षा पाँचवीं के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा से अधिकारियों को प्रभावित किया। छात्र निशांत ने कठिन गुणा का सवाल हल करके दिखाया, वहीं छात्र अनुराग ने बिना रुके किताब का पाठ पढ़कर सुनाया। बच्चों ने अंग्रेजी में आत्मविश्वास के साथ अपना परिचय भी दिया। बच्चों की प्रतिभा से प्रसन्न कलेक्टर ने उन्हें दिशाओं का पाठ पढ़ाया और विद्यालय में बच्चों के लिए जल्द बैंच उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने विद्यालय परिसर में अधूरे भवन को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश भी दिए। आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों का अपने समक्ष वजन करवाकर उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

पंचायतों के नवाचार बने बदलाव की मिसाल

भ्रमण के दौरान ग्राम पंचायतों के रचनात्मक और प्रेरणादायक कार्य भी सामने आए। ग्राम पंचायत बड़ेराभारस में दो गौशालाओं का सफल संचालन और वृक्षारोपण से पर्यावरण संरक्षण के प्रयास उल्लेखनीय रहे। ग्राम तोड़ा में हनुमान मंदिर के समीप जल संरचनाओं को विकसित कर क्षेत्र को आकर्षक पिकनिक स्पॉट के रूप में तैयार किया जा रहा है। कलेक्टर ने यहाँ संचालित गौशाला का निरीक्षण किया तथा “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत मुक्तिधाम परिसर में सीईओ सोजान सिंह  के साथ पौधरोपण किया। गौ संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले 17 गौ सेवकों को ग्राम पंचायत की ओर से सम्मानित भी किया गया। कलेक्टर ने तोड़ा स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उप स्वास्थ्य केन्द्र) का भी निरीक्षण किया। ग्रामीणों ने यहाँ पदस्थ स्टॉफ की सेवाभावना की सराहना की।

सरकारी योजनाओं से बदली जिंदगी, अब दूसरों को दे रहे रोजगार

अमरौल शिविर में उद्यमियों के प्रेरक अनुभव युवाओं के लिए आकर्षण का केन्द्र रहे। चीनौर और अमरौल क्षेत्र के ऐसे उद्यमियों ने अपनी सफलता की कहानी साझा की, जिन्होंने सरकारी स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लेकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने की राह बनाई। जीवाजी विवि से विज्ञान में स्नातक मदन सिंह कुशवाह ने बताया कि वे पहले सरकारी नौकरी की तलाश में ग्वालियर में रहते थे। कोविड काल में गाँव लौटने के बाद मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत 10 लाख रुपए का ऋण लेकर खाद-बीज की दुकान शुरू की। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर होने के साथ लगभग 10 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। कलेक्टर ने उन्हें औषधीय पौधों और जैविक खेती की दिशा में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसी तरह धाराजीत किरार ने पीएम रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 25 लाख रुपए का ऋण लेकर अपने मोटर बाइंडिंग व्यवसाय का विस्तार किया। उनके उद्यम से तीन-चार अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। चीनौर निवासी सोनू कुशवाह ने बताया कि वे पहले फूल-मालाओं की दुकान लगाते थे। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत एक लाख रुपए का ऋण लेकर उन्होंने डेकोरेशन का व्यवसाय शुरू किया, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। चीनौर के शेखर कुशवाह, धनवंत सिंह और संजय गुप्ता ने भी स्वरोजगारमूलक योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के अपने अनुभव साझा किए। इन कहानियों ने शिविर में मौजूद युवाओं को संदेश दिया कि अवसर मिलने पर गाँव की प्रतिभा और मेहनत भी रोजगार देने वाली शक्ति बन सकती है।

हितलाभ वितरण के साथ मजबूत हुआ जन-विश्वास

शिविर में अनुग्रह सहायता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन के स्वीकृति पत्र, राजस्व प्रकरणों के निराकरण से संबंधित दस्तावेज तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितलाभ वितरित किए गए। नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएँ भी उपलब्ध कराई गईं।  अमरौल शिविर प्रशासन और जनता के बीच संवाद की मजबूत कड़ी बनकर सामने आया। शिकायतों के समाधान से लेकर प्रतिभाओं के प्रोत्साहन, उद्यमिता को बढ़ावा देने और ग्राम पंचायतों के अच्छे कार्यों को पहचान देने तक पूरे आयोजन में यही संदेश स्पष्ट रहा कि प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप संवेदनशील प्रशासन जब गाँव की धरती पर पहुँचकर जनता की बात सुनता है, तो समस्याओं के समाधान के साथ सरकार के प्रति विश्वास भी मजबूत होता है।