वुमन

'अब ये हाथ सिर्फ फ्यूल नहीं भरते, मान-सम्मान के साथ परिवार की उम्मीदें भी भरते हैं': चार और जरूरतमंद महिलाओं ने

ग्वालियर जिले में ‘शक्ति दीदी’ के रूप में हुआ नवाचार महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बन गया है, जरूरतमंद महिलाएं ‘शक्ति दीदी’ बनकर हो रहीं हैं आत्मनिर्भर, अब तक 127 महिलाएं बन चुकी हैं शक्ति दीदी

ग्वालियर। कभी रोजगार की तलाश में घर की चौखट तक सीमित रहने वाली अपनों से उपेक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की जरूरतमंद महिलाएं पेट्रोल पंपों पर सफलता-पूर्वक फ्यूल डिलीवरी की जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं। इन महिलाओं के हाथ सिर्फ वाहनों में ईंधन ही नहीं भर रहे, बल्कि मान-सम्मान व आत्मविश्वास के साथ अपने और परिजनों के जीवन में सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई ऊर्जा भी भर रहे हैं। 

ग्वालियर जिले में ‘शक्ति दीदी’ के रूप में हुआ नवाचार महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बन गया है। बीते रोज जिले की 4 और जरूरतमंद महिलाएं शक्ति दीदी बनीं। जिले में अब 127 महिलाएं सफलतापूर्वक शक्ति दीदी के रूप में फ्यूल डिलीवरी वर्कर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप कलेक्टर रुचिका चौहान ने शक्ति दीदी नवाचार किया है। यह नवाचार जरूरतमंद महिलाओं को केवल रोजगार देने के लिए ही नहीं , उन्हें समाज में सम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़ा करने के उद्देश्य से किया गया है। ‘शक्ति दीदी’ बनकर महिलाएं स्वयं की पहचान तो बना ही रही हैं, साथ ही परिवार की आर्थिक मजबूती में भी सहभागी बनीं हैं। कलेक्टर रुचिका चौहान ने गुरुवार को हुरावली स्थित एचपीसीएल सर्विस सेंटर पर शक्ति दीदी नवाचार के तहत सम्मानपूर्वक फूल मालाएं व जैकेट पहनाकर सुश्री मंजू, सुश्री काजल और सुश्री पूनम को फ्यूल डिलीवरी वर्कर की जिम्मेदारी सौंपी। वहीं कलेक्ट्रेट के पीछे जिला पंचायत रोड स्थित वैश्य एंड मुखर्जी पेट्रोल पंप पर भी एडीएम सीबी प्रसाद की मौजूदगी में सुश्री सीमा सोलंकी ‘शक्ति दीदी’ बनीं।

शक्ति दीदियों बोलीं हमें रोजगार ही नहीं सम्मान व आत्मविश्वास भी मिला है….

फ्यूल डिलेवरी वर्कर की भूमिका निभा रहीं मंजू, काजल एवं अन्य शक्ति दीदियों का कहना है कि हमें केवल रोजगार ही नहीं, सम्मान-पूर्वक आगे बढ़ने का भी अवसर मिला है। शक्ति दीदियां कहती हैं कि पेट्रोल पंप पर जब हम फ्यूल डिलीवरी वर्कर की जिम्मेदारी सफलता-पूर्वक निभाते हैं, तो हमारा आत्मविश्वास बढ़ जाता है। साथ ही ऐसा लगता है कि अब हम किसी के सहारे के मोहताज नहीं, बल्कि अपने परिवार का सहारा हैं। ग्वालियर का यह नवाचार उन महिलाओं के लिए उम्मीद की बड़ी किरण बन गया है, जो परिस्थितियोंवश परेशान रहीं हैं।हैं।