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शिक्षा के नाम पर धार्मिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास बर्दाश्त नहीं होगा: अभाविप ग्वालियर महानगर ने ग्वालियर पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन

ग्वालियर के निजी प्रकाशक द्वारा विवादित प्रश्न प्रकाशित करने वाले प्रकाशक पर FIR दर्ज करने की मांग की, अभाविप ने छात्र हित एवं सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन करने की चेतावनी दी है

ग्वालियर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने ग्वालियर के निजी प्रकाशक विश्वविद्यालय प्रकाशन (रजिस्टर्ड) द्वारा प्रकाशित अध्ययन सामग्री में धार्मिक आधार पर विवादित एवं भ्रामक प्रश्न प्रकाशित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। इस संबंध में अभाविप ग्वालियर के प्रतिनिधि मण्डल ने ग्वालियर पुलिस अधीक्षक धर्मवीर यादव को ज्ञापन सौंपकर संबंधित प्रकाशक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

अभाविप के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रकाशन (रजिस्टर्ड), ग्वालियर द्वारा स्नातक द्वितीय वर्ष के आधार पाठ्यक्रम “महिला सशक्तिकरण”विषय की “20 प्रश्न”नामक पुस्तक सत्र 2026 की परीक्षाओं के लिए बाजार में बेची जा रही है। उक्त पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक 31 पर प्रश्न क्रमांक 206 में धार्मिक आधार पर तुलनात्मक प्रश्न पूछा गया है कि “कौन सा धर्म अपने उपदेशों में सर्वाधिक महिला अधिकारों की रक्षा की बात करता है?” तथा उसके उत्तर में एक विशेष धर्म को सही बताया गया है।

अभाविप का कहना है कि यह प्रश्न शैक्षणिक दृष्टि से असंगत, मनगढ़ंत एवं पक्षपातपूर्ण है, जो विद्यार्थियों के मध्य धार्मिक वैमनस्य, भ्रम एवं असंतोष की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। भारत की शिक्षा व्यवस्था, संविधान एवं सांस्कृतिक परंपरा सभी धर्मों के प्रति सम्मान का भाव रखने की प्रेरणा देती है। ऐसे में उच्च शिक्षा की अध्ययन सामग्री में इस प्रकार के विवादास्पद एवं आधारहीन प्रश्नों का समावेश करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं आपत्तिजनक है।

अभाविप ने मांग की है कि छात्र एवं शिक्षा हित में संबंधित प्रकाशक के विरुद्ध तत्काल जांच कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। विद्यार्थी परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो अभाविप विद्यार्थी हित एवं सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगी।