ग्वालियर। ग्रामीण नागरिकों को उनकी आवासीय संपत्ति का वास्तविक मालिकाना हक दिलाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा संचालित "स्वामित्व योजना" को ग्वालियर जिले में मिशन मोड पर पूरा किया जा रहा है। कलेक्टर रुचिका चौहान के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा इस दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत रविवार को सार्वजनिक अवकाश के बावजूद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व अमले ने गाँव-गाँव में पहुँचकर स्वामित्व योजना का काम किया।
विशेष अभियान के तहत रविवार को अपर जिला दण्डाधिकारी सीबी प्रसाद ने तानसेन तहसील के विभिन्न ग्रामों का सघन दौरा किया। उन्होंने ग्राम डबका, डोंगरपुर और बेहट पहुँचकर स्वामित्व योजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने न केवल कार्यों का निरीक्षण किया, बल्कि मौके पर ही पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टियां भी सुनिश्चित कराईं। इसी क्रम में एसडीएम भितरवार राजीव समाधिया ने भी अपने क्षेत्र के ग्राम गोहिंदा, बाजना और अन्य प्रभावित गाँवों का भ्रमण किया। उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर योजना के लाभ बताए और राजस्व अधिकारियों को शेष कार्यों को त्वरित गति से पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसी तरह जिले के अन्य एसडीएम व तहसीलदारों सहित संबंधित अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यों को गति दी।
गुणवत्ता और समय-सीमा पर विशेष जोर
कलेक्टर रुचिका चौहान ने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्वामित्व योजना के शेष कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा है कि नक्शों का सत्यापन, अभिलेखों का परीक्षण और पोर्टल पर प्रविष्टियों का कार्य पूरी गुणवत्ता एवं पारदर्शिता के साथ किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा है कि पात्र हितग्राहियों को उनके संपत्ति कार्ड (स्वामित्व अभिलेख) उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर पर विलंब न हो।
स्वामित्व योजना और इसके लाभ
स्वामित्व योजना सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से आवासीय संपत्तियों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करती है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं।
• वैधानिक अधिकार: ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक मिलता है।
• वित्तीय सुलभता: संपत्ति कार्ड के आधार पर ग्रामीण बैंकों से ऋण और अन्य वित्तीय लाभ आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
• विवादों में कमी: सटीक भू-अभिलेखों से संपत्ति संबंधी आपसी विवादों का स्थाई समाधान होता है।
• व्यवस्थित विकास: इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शी और नियोजित ग्राम पंचायत विकास योजनाओं को बल मिलता है।
