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राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन; बिलौआ के किसान ने प्राकतिक खेती करने बनाया है बायो रिसोर्स सेंटर, सीईओ ने इस बायो रिसोर्स सेंटर का भ्रमण कर कहा- प्राकृतिक खेती करने वाले किसान को कृषि विभाग हर संभव मदद करें

सरसों में किसान को माहू का प्रकोप रोकने के लिए कृषि विभाग ने दी सलाह, एक ही दवा का बार-बार प्रयोग न करें

उप संचालक कृषि ने कृषक को प्राकृतिक खेती मिशन में दी जाने वाली सुविधाओं से अवगत कराया,  जिपं के सीईओ ने इस बायो रिसोर्स सेंटर का भ्रमण किया

ग्वालियर। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्राकतिक खेती को बढावा दिया जा रहा है। बिलौआ में प्राकतिक खेती के लिए किसान प्राण सिंह माथुर के खेत में बीआरसी बायोरिसोर्स सेंटर स्थापित किया है। इस बायोरिसोर्स सेंटर का सीईओ जिला पंचायत सोजान सिंह रावत ने भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने बायोरिसोर्स सेंटर को संचालित करने से संबंधित सभी सामग्री एवं मशीनें संबंधित कृषक को उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिये हैं। 

किसान अब प्राकृतिक खेती से जुड़ रहे है। प्राकृतिक खेती में किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग नहीं किया जाता है। साथ ही खेतों में गाय एवं भैंस के गोबर से निर्मित प्राकृतिक खाद डाली जाती है। बिलौआ में किसान प्राण सिंह माथुर के यहां बीआरसी बायो रिसोर्स सेंटर स्थापित की गई है। इसमें गोबर से गैस एवं खाद बनाई जाएगी। इस बायोरिसोर्स सेंटर का जिला पंचायत सीईओ सोजान सिंह रावत ने भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान किसान द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए तैयार किये जाने वाले आदान सामग्री जैसे- जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, दसपर्णीय अर्क बृहमास्त्र आदि बनाने की प्रक्रिया एवं लगने वाली सामग्री के बारे में विस्तार से चर्चा की । इसके साथ ही किसान प्राण सिंह माथुर द्वारा उगाये जा रही प्राकृतिक फसलें जैसे गेहू, आलू, उद्यानिकी फसलें एवं मछली पालन का निरीक्षण किया। सीईओ रावत ने प्राकृतिक खेती के लिए आदान सामग्री आसानी से अधिक अधिक से कृषक भाईयों को उपलब्ध हो सकें, साथ ही बायो रिसोर्स सेंटर को संचालित करने से संबंधित सभी सामग्री एवं मशीनें संबंधित कृषक को उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिये है।

निरीक्षण के दौरान मौजूद रणवीर सिंह जाटव, उप संचालक कृषि ग्वालियर के द्वारा कृषक को प्राकृतिक खेती मिशन अंतर्गत दिये जाने वाली सुविधाओं के बारे में अवगत कराया। साथ ही बायो-रिसोर्स सेंटर के संचालन हेतु आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के बारे में भी विस्तार से बताया। निरीक्षण के दौरान सहायक संचालक कृषि नरेश मीणा भी उपस्थित रहे ।

सरसों में किसान को माहू का प्रकोप रोकने कृषि विभाग ने दी सलाह, वर्तमान में सरसों की फसल में माहू का प्रकोप हो रहा है

सरसों फसल में माहू का प्रकोप शुरू हो गया है। ऐसे में किसान सरसों में माहू का प्रकोप रोकने के लिए दवाईयों का छिडकाव करें। उप संचालक कृषि कल्याण तथा कृषि विकास  रणवीर सिंह  ने किसानों से कहा है कि वर्तमान में सरसों की फसल में माहू (एफिड) का प्रकोप हो रहा है। जिसके समय रहते संतुलित नियंत्रण आवश्यक है। अतः किसान भाई अपनी फसलों का नियमित निरीक्षण करें और जब माहू का प्रकोप अधिक हो तब, कृषक भाई माहू के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 125 मिली हेक्टेयर या थायमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी 100 ग्राम हेक्टेयर या एसिटामिप्रिड 20 प्रतिशत 100 ग्राम हेक्टेयर इत्यादि दवा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें ।

छिडकाव के दौरान महत्वपूर्ण सावधानियाँ 

सरसो में छिडकाव सुबह या शाम के समय करें, एक ही दवा का बार-बार प्रयोग न करें। आवश्यकता अनुसार दवाओं का अदल-बदल करें। छिड़काव के समय सुरक्षा उपकरण (दस्ताने, मास्क आदि) का उपयोग करें। मधुमक्खियों व लाभकारी कीटों की सुरक्षा का ध्यान रखें। रासायनिक नियंत्रण के साथ एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) नीम आधारित जैविक कीटनाशकों का भी उपयोग करें। कृषकों से अपील है कि वे जागरूक रहकर अनुशंसित मात्रा एवं विधि का ही पालन करें, जिससे सरसों की फसल सुरक्षित रहे और उत्पादकता एवं उत्पादन में वृद्धि हो, जिससे किसान भाई सरसों की फसल से अधिक से अधिक लाभ उठा सकें।सकें।