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"सफलता की प्रेरक कहानी" ; पीएम स्वरोजगार योजना से "नागार्जुन" हाथठेले से रेस्टोरेंट के मालिक बने, साउथ इंडियन व्यंजनों का रेस्टोरेंट दे रहा है अन्य युवाओं को भी रोजगार

कोविड-19 महामारी के दौरान नागार्जुन ने पीएम स्वरोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत शुरुआत में साउथ इंडियन व्यंजनों का ठेला शुरु कर अपना व्यवसाय प्रारंभ किया था

ग्वालियर। काम करने की इच्छा और दृढ़ संकल्प हो तो तरक्की के द्वार अवश्य खुलते हैं। संकट के समय में भी अपनी मेहनत पर यकीन रखने वाले युवा अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। ग्वालियर के नागार्जुन ने हाथठेले से व्यवसाय प्रारंभ कर कड़ी मेहनत की और आज वे एक रेस्टोरेंट के मालिक हैं और वे अन्य चार-पाँच लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वरोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत कोविड-19 महामारी के दौरान नागार्जुन ने साउथ इंडियन व्यंजनों का ठेला प्रारंभ कर अपना व्यवसाय प्रारंभ किया। 

 आर्थिक कमी के कारण सीमित संसाधनों से उनके प्रतिदिन की आय 500 रुपए से 800 रुपए तक थी। नागार्जुन को जब पीएम रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिली तो उन्होंने वर्ष 2024 में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ठाठीपुर शाखा से 19 लाख रुपए का लोन लेकर साउथ इंडियन व्यंजनों का “उडुपी किचिन” नाम से रेस्टोरेंट की स्थापना की। उनके व्यवसाय की सफलता को देखकर बैंक द्वारा उनकी ऋण सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपए कर दी। 

 नागार्जुन ने कड़ी मेहनत कर ग्वालियर शहर में “उडुपी किचिन” की दो इकाईयां स्थापित कर उसका बेहतर संचालन प्रारंभ किया। उनके किचिन की लोकप्रियता से प्रभावित होकर उनके व्यवसाय को निरंतर प्रगति मिली। वर्तमान में नागार्जुन का वार्षिक कारोबार एक करोड़ रुपए से डेढ़ करोड़ रुपए तक पहुँच चुका है। नागार्जुन प्रधानमंत्री स्वरोजगार कार्यक्रम के माध्यम से न केवल सफल व्यवसायी हैं बल्कि आत्मनिर्भर व्यवसायी के साथ-साथ अन्य बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले सफल उद्यमी भी बन गए हैं। प्रधानमंत्री स्वरोजगार कार्यक्रम के संबंध में वे अपने रेस्टोरेंट में आने वाले अनेक युवाओं को स्वयं का रोजगार स्थापित करने के लिये प्रोत्साहित भी करते हैं।