ग्वालियर। “मां की बगिया” परियोजना के अन्तर्गत खेतों में तार फेंसिंग और पौधों की खरीद में हितग्राहियों को आ रही जमीनी समस्याओं तथा जानकारी के अभाव को दूर करने के उद्देश्य से सरकार की मंशा के अनुरूप जिला पंचायत द्वारा व्यापक संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सोजान सिंह रावत के निर्देशन में जिले के सभी विकासखंड मुख्यालयों पर आपूर्तिकर्ताओं और हितग्राहियों को एक ही मंच पर जोड़ने की पहल की गई है। इसी श्रृंखला में शुक्रवार को विकासखंड मुरार में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस संवाद कार्यक्रम में पारदर्शिता के साथ उच्च गुणवत्ता की सामग्री उपलब्ध कराए जाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही तकनीकी विशेषज्ञों ने हितग्राहियों को पोल की डिजाइन, साइज, कीमत तथा फेंसिंग सामग्री की गुणवत्ता से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। उद्यानिकी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने फलदार पौधों के चयन, किस्म, साइज और उनकी गुणवत्ता पर मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम में पोल विक्रय करने वाली तीन संस्थाओं ने अपने- अपने डिजाइन हितग्राहियों के समक्ष प्रस्तुत किए। साथ ही कटीले तार के व्यापारियों ने दरों और उपलब्धता की जानकारी साझा की। नर्सरियों एवं संबंधित विभागों ने उपलब्ध फलदार पौधों की किस्मों, दरों और गुणवत्ता की जानकारी देकर हितग्राहियों की शंकाओं का समाधान किया। कृषि सखी, ग्रामीण महिलाओं और हितग्राही परिवारों ने उत्साहपूर्वक चर्चा में भाग लिया और सामग्री चयन से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत, जनपद पंचायत अध्यक्ष दिलराज सिंह एवं जनपद एवं मनरेगा- एनआरएलएम टीम सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को परियोजना की प्रक्रिया को समझने और गुणवत्तापूर्ण सामग्री चुनने का अवसर मिला।
सीईओ जिला पंचायत ग्वालियर ने बताया कि “पूरे जिले में ऐसे शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि दीदियों को एक ही स्थान पर सभी विकल्प उपलब्ध हो सकें और वे अपनी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त सामग्री का चयन कर सकें।”
संवाद कार्यक्रम में शामिल हुईं ग्राम उदयपुर की ज्योति राणा ने कहा, “मां की बगिया योजना में सामग्री खरीदने में जो कठिनाइयाँ आ रही थीं, उनका समाधान इस आयोजन से मिल गया। अब हम अपनी पसंद की सामग्री आसानी से खरीद पाएंगे।”
ग्राम सिरसौद की राजो बाई ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “इस संवाद कार्यक्रम से हमें तार फेंसिंग की सही जानकारी मिली है। अब हम अपने खेत पर बेहतर गुणवत्ता का काम कम समय में कर सकेंगे।”
