
ग्वालियर। नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसका महत्व है। ऋतु परिवर्तन के इस समय उपवास रखने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और सात्त्विक आहार ग्रहण करने से शरीर व मन दोनों शुद्ध होते हैं। नवरात्रि शक्ति की साधना का समय है। यह 9 दिन भक्त माता की साधना करते हैं और 10वें दिन व्रत पारण किया जाता है। सनातन धर्म में यह मान्यता है इस दौरान माता दुर्गा के 9 स्वरूप की पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
चैत्र नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह देवी दुर्गा की आराधना के साथ आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करने का अवसर होता है। यह पर्व धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा, संकल्प और शुद्धता लाने का माध्यम भी है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाले ये नौ दिन शक्ति की उपासना के लिए विशेष माने जाते हैं।
नवरात्र 8 या 9 दिन; तिथि क्षय शुभ संकेत नहीं!
इस साल नवरात्रि में 8 या 9 कितने दिन माता की पूजा की जाएगी, क्या तिथियां घट-बढ़ रही है। इस विषय में आचार्य और पड़ितो के अलग अलग मत है । नवरात्रि में तिथियों में हेर फेर के कारण कभी कभी नौ दिनों का ये उत्सव 8 दिनों का हो जाता है।
इस साल चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो रही है और इसका समापन 6 अप्रैल को होगा। ऐसे में पंचांग अनुसार द्वितीया और तृतीया तिथि एक ही दिन है। तिथि क्षय के कारण नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 8 दिन की होगी। नवरात्र में तिथि क्षय (दिन कम होना) शुभ संकेत नहीं माना जाता।
घट स्थापना शुभ मुहूर्त: अभिजित 11:59 से 12:49 तक
सुबह 6.12 से सुबह 10.20 तक : इस दौरान घट स्थापना करने से स्थिर सुख, समृद्धि और धन लाभ मिलने की मान्यता है।
सुबह 11:59 से दोपहर 12:49 तक, यह अभिजित मुहूर्त है। माना जाता है इस मुहूर्त में घट स्थापना करने से अच्छी सेहत, सौभाग्य और ऐश्वर्य बढ़ता है।
आंतरिक शक्ति को पहचानने का पर्व हैं
चैत्र नवरात्रि शक्ति उपासना का पर्व होने के साथ- आत्मसंयम, साधना और सकारात्मकता को अपनाने का समय भी है। इन नौ दिनों में की गई भक्ति और अनुष्ठान जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक शक्ति प्रदान करते हैं। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जब हम अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानते हैं और आध्यात्मिक साधना में मन लगाते हैं, तो जीवन की हर कठिनाई पर विजय प्राप्त करना संभव है। इस नवरात्रि, माँ दुर्गा की कृपा से अपने जीवन में शक्ति, भक्ति और समृद्धि का संचार करें।
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी कब
इस चैत्र नवरात्र में महाअष्टमी तिथि 5 अप्रैल और महानवमी 6 अप्रैल 2025 को पड़ेगी । नवरात्रि में ये दो दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दिन माता के प्रिय भोग नारियल, चना पूड़ी का प्रसाद चढ़ाया जाता है। फिर कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराएं. संधि काल अर्थात संध्या काल में भी माता की पूजा करें।
दुर्गा स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थितः, या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरुपेण संस्थितः।
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरुपेण संस्थितः, नमस्तस्यैः नमस्तस्यैः नमस्तस्यैः नमो नमः।।