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"श्रमदान से संवरा ऐतिहासिक पृथ्वीताल"; जनसहयोग से चला स्वच्छता अभियान, 500 से अधिक पौधों के रोपण से हरियाली का संकल्प, तालाब परिसर की साफ-सफाई की और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया

करीब 7.5 हेक्टेयर में फैले पृथ्वीताल का जीर्णोद्धार तीन करोड़ रुपये से हुआ है , नागरिकों से अपील की गई है कि जलाशयों की स्वच्छता बनाए रखना केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है

ग्वालियर। पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में नगर निगम ग्वालियर द्वारा ग्राम खुरैरी स्थित ऐतिहासिक पृथ्वीताल पर व्यापक स्वच्छता एवं पौधारोपण अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान में नगर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों, आईईसी टीम तथा स्थानीय नागरिकों ने श्रमदान कर तालाब परिसर की साफ-सफाई की और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

अपर आयुक्त टी प्रतीक राव के निर्देशन में नगर निगम ग्वालियर द्वारा निरंतर स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है एवं पर्यावरण की दृष्टि से विभिन्न चयनित स्थानों पर पौधारोपण भी किया जा रहा है। शनिवार को अभियान के दौरान तालाब के आसपास फैली पॉलीथिन, प्लास्टिक एवं अन्य कचरे को हटाया गया। साथ ही तालाब में गिरी पेड़ों की पत्तियों, जमी मिट्टी तथा अन्य गंदगी को साफ कर परिसर को स्वच्छ एवं आकर्षक बनाया गया। नगर निगम अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि जलाशयों की स्वच्छता बनाए रखना केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर उपायुक्त मुकेश बंसल, सहायक यंत्री शैलेंद्र सक्सेना सहित नगर निगम के अन्य अधिकारी, कर्मचारी, आईईसी टीम तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। सभी ने श्रमदान कर स्वच्छता अभियान को सफल बनाया और स्वच्छ एवं हरित ग्वालियर के निर्माण का संकल्प लिया।

*तीन करोड़ रुपये से हुआ है पृथ्वीताल का कायाकल्प*

करीब 7.5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले ग्राम खुरैरी स्थित पृथ्वीताल का नगर निगम द्वारा लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार कराया गया है। इस कार्य के अंतर्गत तालाब में वर्षों से जमा सिल्ट को हटाया गया, जलधारण क्षमता बढ़ाई गई तथा पूरे परिसर को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया गया।

तालाब के चारों ओर आकर्षक वॉकिंग ट्रैक, लोगों के बैठने के लिए बेंच, हरित क्षेत्र एवं सामाजिक गतिविधियों के लिए विशेष स्थान विकसित किए गए हैं, जिससे यह स्थल अब नागरिकों के लिए प्राकृतिक सौंदर्य, स्वास्थ्य और मनोरंजन का प्रमुख केंद्र बन गया है।

*सर्दियों में बनता है प्रवासी पक्षियों का बसेरा*

पृथ्वीताल केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। प्रत्येक वर्ष सर्दियों के मौसम में यहां 120 से अधिक प्रजातियों के देशी एवं विदेशी प्रवासी पक्षी आते हैं। इन पक्षियों की मधुर चह-चहाहट और कलरव से पूरा क्षेत्र जीवंत हो उठता है। पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान विशेष आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

*भरतपुर बर्ड सेंचुरी की तर्ज पर होगा विकास*

नगर निगम की योजना पृथ्वीताल को भरतपुर बर्ड सेंचुरी की तर्ज पर विकसित करने की है, ताकि यहां प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके। इस दिशा में निरंतर विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में यह स्थल ग्वालियर की पहचान बनने के साथ पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज्म का महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।

*500 से अधिक पौधों का रोपण, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प*

स्वच्छता अभियान के साथ-साथ जनसहयोग से वृहद स्तर पर पौधारोपण अभियान भी चलाया गया। इस दौरान 500 से अधिक पौधे लगाए गए, जिनमें आम, जामुन, नीम, कचनार, बरगद, पीपल, सेहजन, अमरूद सहित अनेक छायादार एवं फलदार प्रजातियां शामिल हैं। इन पौधों के माध्यम से न केवल क्षेत्र की हरियाली बढ़ेगी, बल्कि यहां आने वाले पक्षियों को प्राकृतिक भोजन और सुरक्षित आवास भी उपलब्ध होगा। नगर निगम ने उपस्थित नागरिकों से लगाए गए पौधों के संरक्षण का संकल्प भी दिलाया, ताकि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र घने हरित वन क्षेत्र के रूप में विकसित हो सके।

*जनभागीदारी से ही सफल होगा पर्यावरण संरक्षण*

नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनआंदोलन है। यदि प्रत्येक नागरिक जलाशयों की स्वच्छता, पौधारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे, तो ग्वालियर को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण की दृष्टि से समृद्ध शहर बनाया जा सकता है।

पृथ्वीताल पर आयोजित यह अभियान इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब प्रशासन और समाज एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो प्रकृति संरक्षण का सपना साकार होने लगता है।है।