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VRG कॉलेज में सेमिनार :"स्टूडेंट्स को सिखाए कबाड़ से जुगाड़ के तरीके"; स्वच्छता कंसलटेंट और ब्रांड एंबेसडर ने RRR के माध्यम से जुगाड बनाने के तरीके विद्यार्थियों को बताए, कहा जितना हम कचरे का उपयोग करेंगे उतना कचरा कम होगा

स्वच्छ सर्वेक्षण में आरआरआर के उपयोग के अलग से अंक निर्धारित हैं, विजया राजे गर्ल्स कॉलेज मुरार में 'ठोस अपशिष्ट नियम 2026' के नियमों के बारे में जागरूक करने के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया

ग्वालियर। ठोस अपशिष्ट नियम 2026 के नियमों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए वीआरजी कॉलेज में सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें अपर आयुक्त नगर निगम  मुकेश बंसल, कार्यपालन यंत्री शैलेंद्र सक्सेना, सहायक खेल अधिकारी सुश्री विजेता चौहान, कंसलटेंट देवेंद्र निम, स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर डॉ प्रियंवदा भसीन, प्रमोद धनेले आदि ने विद्यार्थियों को कबाड़ से जुगाड़ एवं कचरा अलग-अलग करने के बारे में जानकारी दी।

गर्ल्स कॉलेज की एनएनएस इकाई के सहयोग से आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए उपायुक्त  मुकेश बंसल ने विद्यार्थियों से चार प्रकार का कचरा अपने अपने घरों से ही अलग-अलग कर डोर टू डोर टिपर वाहन में देने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि गीला, सूखा, विशेष देखभाल एवं सेनेटरी वेस्ट कचरे को अलग-अलग कर देने से जब यह कचरा कचरा ट्रांसफर पर पहुंचता है तो इसे अलग-अलग करने में बेहद आसानी रहती है, इससे निगम के संसाधन कम खर्च होते हैं, साथ ही कार्य भी जल्दी पूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि गीले कचरे से केदारपुर लैण्डफिल साइड पर खाद बनाई जा रही है। जबकि सूखे कचरे का अन्य कार्यों में उपयोग किया जा रह है। 

बल्क वेस्ट जनरेटरों को बनानी होगी कचरा निस्तारण यूनिट

  ठोस अपशिष्ट नियम 2026 के नियमों के बारे में बताते हुए स्वच्छता कंसलटेंट देवेंद्र निम ने कहा कि नए नियमों के तहत अब कॉलेज भी बल्क वेस्ट जनरेटरों की कैटेगरी में शामिल हो गए हैं, जिसके कारण अब कॉलेजों में गीले कचरे से खाद बनाने की इकाई लगाई जानी है। उन्होंने गीले कचरे से खाद कैसे तैयार की जाए, इसके बारे में जानकारी दी।

कबाड़ से कैसे बनाए जुगाड़

स्वच्छता कंसलटेंट देवेंद्र निम एवं स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर डॉ प्रियंवदा भसीन ने सेमिनार में आरआरआर के तहत कबाड़ से जुगाड़  बनाने के तरीके विद्यार्थियों को बताए। उन्होंने कहा कि जितना हम कचरे का उपयोग करेंगे उतना ही कचरा कम होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण में आरआरआर के उपयोग के अलग से अंक निर्धारित हैं।