ग्वालियर। मुरैना जिले में किसानों को उर्वरकों की समय पर, सुगम एवं पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ई- विकास प्रणाली प्रभावी रूप से लागू की गई है। जिले में 26 जनवरी 2026 से इस प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आंशिक संचालन प्रारंभ किया गया था, जिसे 01 अप्रैल 2026 से पूर्ण रूप से लागू कर दिया गया है। इसके माध्यम से उर्वरक विक्रय एवं वितरण की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है, जिससे संपूर्ण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।
कलेक्टर के निर्देशन में प्रभावी निगरानी
मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देशन में जिले में ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक वितरण व्यवस्था की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने तथा वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए कृषि विभाग को नियमित निरीक्षण एवं सघन निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में उर्वरक विक्रेताओं द्वारा ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत निर्धारित नियमों के पालन की लगातार समीक्षा की जा रही है।
बीते दिनों वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, ब्लॉक पोरसा द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक विक्रेताओं के अभिलेख निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप संधारित नहीं पाए जाने पर दो निजी उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इनमें घनश्याम ट्रेडर्स, अटेर रोड पोरसा तथा रामअवतार मुरारीलाल, अटेर रोड पोरसा शामिल हैं।
इसी प्रकार वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, मुरैना के प्रतिवेदन के आधार पर ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक विक्रय में अनियमितता पाए जाने पर चार निजी उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किए हैं। इनमें मैसर्स राजपूत एग्री सेल्स, बानमोर; मैसर्स श्याम खाद भण्डार, एबी रोड टेकरी, मुरैना; मैसर्स शिव खाद भण्डार, बड़ागांव, मुरैना तथा मैसर्स देवीराम वासुदेव प्रसाद, फाटक बाहर, मुरैना शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त थोक उर्वरक विक्रेता आईडी से फुटकर विक्रेता आईडी पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप उर्वरक का अंतरण नहीं करने वाले 18 निजी एवं सहकारी उर्वरक विक्रेताओं को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
ई-विकास प्रणाली से बढ़ी पारदर्शिता, किसानों के हित सर्वोपरि
ई-विकास प्रणाली लागू होने से उर्वरक वितरण प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल एवं पारदर्शी हो गई है। इस व्यवस्था के माध्यम से उर्वरकों की उपलब्धता, विक्रय एवं वितरण की ऑनलाइन निगरानी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे किसानों को आवश्यकता के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के साथ-साथ वितरण व्यवस्था में अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
कृषि विभाग द्वारा जिले के सभी उर्वरक विक्रेताओं को ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता अथवा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
