ग्वालियर। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र मास की अमावस्या दो दिनों तक रहेगी, जिससे लोगों में तिथि को लेकर थोड़ी भ्रम की स्थिति बनी है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि पूजा का सही समय कब है और चैत्र नवरात्रि की शुरुआत किस दिन से होगी।
इस वर्ष चैत्र अमावस्या की तिथि 18 मार्च सुबह 8:25 बजे से शुरू होकर 19 मार्च सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। इसी कारण अमावस्या का प्रभाव दोनों दिन दिखाई देगा, हालांकि, धार्मिक दृष्टि से तर्पण और दान-पुण्य के लिए 18 मार्च का दिन अधिक शुभ माना है, क्योंकि इस दिन दोपहर के समय अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी। 19 मार्च की सुबह अमावस्या समाप्त हो जाएगी और इसके बाद चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शुरू होगी, जिससे चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होगा, यह नवरात्रि 27 मार्च तक चलेगी
दुनिया में सारी शक्ति का केंद्र नारी या स्त्री स्वरूप के पास ही है, इसलिए नवरात्रि में देवी की उपासना ही की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है। और हर स्वरूप से विशेष वरदान मिलता है। इसके साथ ही ग्रहों की बाधा भी समाप्त हो जाती है। इस बार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च 2026 तक रहेगी
नवरात्र में शिवशक्ति के 9 स्वरूपों की होती है पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के स्वरूप शैलपुत्री की आराधना की जाती है। मां शैलपुत्री शक्ति और दृढ़ता की प्रतीक हैं। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या और शांति की प्रतीक हैं। तीसरे दिन चंद्रघंटा की पूजा होती है। मां चंद्रघंटा साहस और सुख-शांति की प्रतीक मानी जाती हैं। चौथे दिन रचनात्मकता और ऊर्जा की प्रतीक कूष्मांडा माता की पूजा होती है। पांचवें दिन वात्सल्य और ज्ञान की प्रतीक मां स्कंदमाता की पूजा, छठे दिन नियम और ज्ञान की प्रतीक मां कात्यायनी की आराधना, तथा सातवें दिन भय का नाश और आत्मविश्वास जगाने वाली कालरात्रि की पूजा और आठवें दिन पवित्रता और शांति की प्रतीक महागौरी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही नौवें दिन ज्ञान और मोक्ष की प्रतीक सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है।है।
इस बार देवी के आगमन से मिल रहे हैं यह संकेत...
इस बार नवरात्रि भी पूरे नौ दिनों की होगी और इस बार माता का आगमन भी पालकी पर हो रहा है। वही इस बार माता की विदाई हाथी पर होगी। शास्त्रों में मां दुर्गा का पालकी पर आगमन को शुभ नहीं माना जाता है, इससे देश-दुनिया में महामारी, प्राकृतिक आपदा, उपद्रव, दंगे और जनहानि जैसी स्थितियां पैदा होती हैं।
प्रतिपदा के दिन है कलश स्थापना का मुहूर्त
कलश की स्थापना चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को ही की जाती है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06.52 पर आरम्भ हो रही है, इसलिए कलश की स्थापना इसके बाद की जाएगी। सबसे अच्छा समय प्रातः 06.52 से प्रातः 07.42 का है। इसके अलावा दोपहर 12.04 से 12.52 के बीच भी कलश स्थापना की जा सकती है।
राज्यपाल ने गुड़ी पड़वा और भारतीय नववर्ष पर दी हार्दिक बधाई, नागरिकों से स्वयं को समर्पित करने का आहृवान किया
भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रदेश के समस्त नागरिकों को 'गुड़ी पड़वा' और 'भारतीय नव वर्ष' के पावन अवसर पर हार्दिक बधाई एवं आत्मीय शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने प्रार्थना की है कि शक्ति की उपासना का यह पर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और उत्तम स्वास्थ्य का संचार करे।
राज्यपाल ने अपने संदेश में भारतीय कालगणना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा है कि चैत्र नवरात्रि के साथ प्रारंभ होने वाला हमारा नववर्ष प्रकृति के नव-श्रृंगार, उमंग और भारत की गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर है।
राज्यपाल पटेल ने समस्त प्रदेशवासियों का आह्वान किया है कि वे नववर्ष के इस शुभ अवसर पर प्रदेश की एकता, अखंडता और खुशहाली के लिए स्वयं को समर्पित करने का संकल्प लें।
