क्राइम

"कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई"; शासकीय खाद्यान्न का गबन करने वाले दो उचित मूल्य की दुकानों के संचालकों पर एफआईआर, कानूनी कार्रवाई के साथ गबन खाद्यान्न की राशि वसूली भी आरआरसी की तरह होगी

दोनों उचित मूल्य की दुकानों के विक्रेताओं के खिलाफ ईसी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया है, साथ ही खाद्य विभाग द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है

पीडीएस की दीपक प्राथमिक उपभोक्ता भंडार के विक्रेता द्वारा गेहूँ, चावल एवं 500 kg नमक का गबन किया है, गबन किए गए शासकीय खाद्यान्न की कुल राशि ₹3.25 लाख से अधिक है

ग्वालियर शहर में संचालित दो शासकीय उचित मूल्य दुकानों के विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। उचित मूल्य की दुकानों से शासकीय खाद्यान्न का गबन किए जाने पर उनके विरुद्ध खाद्य विभाग द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है।

 सहायक आपूर्ति अधिकारी सौरभ जैन से प्राप्त जानकारी के अनुसार शासकीय उचित मूल्य दुकान दीपक प्राथमिक उपभोक्ता भंडार के विक्रेता अयान खत्री द्वारा 79.86 क्विंटल गेहूँ, 19.69 क्विंटल चावल एवं 499 किलोग्राम नमक का गबन किया गया। गबन किए गए शासकीय खाद्यान्न की कुल राशि 3 लाख 25 हजार 825 रुपये है। इसी प्रकार शासकीय उचित मूल्य दुकान लोहमंडी प्राथमिक उपभोक्ता भंडार के विक्रेता राहुल खत्री द्वारा 100.07 क्विंटल गेहूँ, 23.53 क्विंटल चावल, 208 किलोग्राम नमक एवं 58 किलोग्राम शक्कर का गबन किया गया। इस खाद्यान्न की कुल कीमत 4 लाख 60 हजार 060 रुपये है।

दोनों उचित मूल्य की दुकानों के विक्रेताओं के खिलाफ पुलिस थाना ग्वालियर में ईसी एक्ट के तहत अपराध क्रमांक 0472 एवं 0473 दर्ज कराया गया है। साथ ही खाद्य विभाग द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर रुचिका चौहान के स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं के लिये शासन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए। उन्होंने खाद्य विभाग के अधिकारियों को अभियान बतौर उचित मूल्य की दुकानों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में यह कार्रवाई की गई है। जिन विक्रेताओं द्वारा खाद्यान्न का गबन किया गया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ उनसे खाद्यान्न की राशि की वसूली भी भू-राजस्व के बकाया (आरआरसी) की तरह की जाएगी।