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‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" की उड़ान से सतना की प्रिया बनीं उत्तरप्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर, निःशुल्क ‘सशक्त वाहिनी अभियान’ की कोचिंग ने दिया सपनों को पंख

सतना की प्रिया ने ओवरऑल मेरिट में 379वीं और गर्ल्स कैटेगरी में 28वीं रैंक हासिल की, प्रिया सिंह अब उत्तरप्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं देंगी

भोपाल। कभी सीमित संसाधनों के बीच ऑनलाइन पढ़ाई के सहारे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाली सतना की बेटी प्रिया सिंह ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो आज जिले की हर बेटी के लिए प्रेरणा बन गया है। प्रिया सिंह अब उत्तरप्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं देंगी। उनकी इस सफलता की कहानी सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा में चयन की कहानी नहीं, बल्कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संकल्प से जुड़ी उस उड़ान की कहानी है, जिसमें सरकारी प्रयास, परिवार का साथ और बेटी की मेहनत मिलकर सफलता का रास्ता बनाते हैं।

सतना शहर के मारुति नगर, शारदा कॉलोनी निवासी प्रिया सिंह ने उत्तरप्रदेश पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में 4,543 सफल अभ्यर्थियों के बीच ओवरऑल 379वीं रैंक और गर्ल्स कैटेगरी में 28वीं रैंक हासिल कर प्रतिभा का परिचय दिया है। प्रिया ने यह सफलता किसी महंगी निजी कोचिंग के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और महिला एवं बाल विकास विभाग, सतना द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत संचालित ‘सशक्त वाहिनी अभियान’ की निःशुल्क कोचिंग के माध्यम से प्राप्त की।

प्रिया की कहानी उन बेटियों के लिए खास संदेश देती है, जो बड़े सपने तो देखती हैं, लेकिन संसाधनों की कमी को अपनी राह की बाधा मान लेती हैं। प्रिया ने भी अपनी तैयारी के दौरान ऑनलाइन अध्ययन के साथ विभाग की निःशुल्क ऑफलाइन कक्षाओं का लाभ लिया। नियमित अध्ययन, अनुशासन और लगातार अभ्यास ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और धीरे-धीरे उनका सपना मंजिल की ओर बढ़ने लगा।

लिखित परीक्षा में सफलता के बाद प्रिया के सामने शारीरिक दक्षता परीक्षा की चुनौती थी। यहां भी उन्होंने अपनी मेहनत का लोहा मनवाया। 2,400 मीटर की दौड़ जहां 16 मिनट में पूरी करनी थी, वहीं प्रिया ने इसे महज 12 मिनट 35 सेकंड में पूरा किया। यह प्रदर्शन उनकी शारीरिक तैयारी के साथ उनके मजबूत इरादों की भी कहानी कहता है।

प्रिया के पिता राजभान सिंह प्रॉपर्टी का काम करते हैं और माता  संतोष सिंह गृहिणी हैं। परिवार के सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने बेटी के सपनों को कभी सीमित नहीं होने दिया। प्रिया के तीनों भाई—नागेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह और सुखेंद्र सिंह,भी उनकी तैयारी के दौरान लगातार उनके साथ खड़े रहे। प्रिया अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, भाइयों और ‘सशक्त वाहिनी अभियान’ की निःशुल्क कोचिंग को देती हैं।

प्रिया की सफलता में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की भावना भी साकार होती दिखाई देती है। यह उपलब्धि बताती है कि जब बेटियों को शिक्षा, अवसर और सही मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार का नाम रोशन करती हैं, बल्कि समाज की दूसरी बेटियों के लिए भी नई राह बनाती हैं। ‘सशक्त वाहिनी अभियान’ के माध्यम से बेटियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क मार्ग-दर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराना इसी सोच को मजबूती देता है।

प्रिया सिंह की सफलता आज उनके परिवार में खुशी का कारण है, लेकिन इससे कहीं बढ़कर यह सतना की उन बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो अपने भविष्य को लेकर सपने देख रही हैं। प्रिया ने साबित कर दिया है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए साधनों से ज्यादा जरूरी है संकल्प, मेहनत और अवसर का सही उपयोग।

एक छोटे से शहर की बेटी से उत्तरप्रदेश पुलिस की सब इंस्पेक्टर बनने तक का प्रिया का सफर यह संदेश देता है कि बेटियों को अवसर दीजिए, वे अपनी मेहनत से सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का यही सपना अब प्रिया की सफलता के रूप में जमीन पर साकार होता नजर आ रहा है।है।