ग्वालियर नगर निगम एवं संस्कार भारती के संयोजन में दो दिवसीय नव संवत्सर महोत्सव की सांय कालीन सभा में कलाकारों द्वारा लोक नृत्य एवं लोक संगीत के माध्यम से नव संवत्सर के महत्व बताए गए।
जल विहार के तैरते मंच पर आकर्षक विद्युत सज्जा के बीच आयोजित शाम की सभा में भी लोक कला की झलक देखने को मिली । भोपाल से आई दीपिका पुरोहित ने लोक गायन से सबका मन मोह लिया। उन्होंने पारंपरिक धुन पर लमटेरा के माध्यम से माता के भजनों की अद्भुत प्रस्तुति दी। फिर पति पत्नी की नोंक झोंक को बुंदेली में प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।
*नाटक से नव संवत्सर की कथा*
इसी क्रम में युवा कलाकारों ने नव संवत्सर पर नाटक का मंचन किया गया, जिसमें नव संवत्सर की उत्पत्ति से लेकर महाभारत के युद्ध सहित धर्म की स्थापना की गाथा को मंच से संगीतमय रूप में युवा कलाकारों द्वारा प्रस्तुतीकरण किया गया। साथ ही राजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रम संवत की स्थापना की गाथाको भी मंच से प्रस्तुत किया गया।गया।
*बुंदेली फ़ाग का गायन भी हुआ*
माहौल में बदलाव कर दतिया से आए कलाकार वासुदेव पुरोहित द्वारा बुंदेली लोक गायन का प्रस्तुतीकरण हुआ। उन्होंने अपने समूह के साथ बुंदेली में फाग गायन के माध्यम से ईसुरी की चौकडिया का गायन किया।
'कलश से माता का स्वागत': बधाई नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति
बुंदेलखंड में पुत्र रत्न होने पर उसे भगवान रामलला का स्वरूप मानकर, नृत्य के माध्यम प्रस्तुति दी जाती है। उसी बधाई नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति सागर से आए कलाकार सुधीर तिवारी व साथियों द्वारा मंच से दी गई। इसके बाद उनके समूह ने ही सिर पर कलश रखकर नवरात्रि का स्वागत किया।
