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सूर्य की पहली किरण को अर्घ्य देकर किया नवसंवत्सर का  स्वागत ; प्रातःकाल संकीर्तन यात्रा से प्रारंभ हुआ नवसंवत्सर स्वागतोत्सव, ज्योति कलश छलके गीत के साथ ही गुडी बांधी

नवसंवत्सर की पूर्व सांध्य पर नगर निगम एवं संस्कार भारती के तत्वावधान में कालयुक्तनाम संवत्सर 2082 का विदाई महोत्सव जल विहार के तैरते मंच पर संगीत के सुरों के साथ संपन्न

ग्वालियर। नवसंवत्सर स्वागोत्सव महोत्सव में सूर्य की प्रथम रश्मि को अर्घ्य देकर रौद्रनाम नव संवत्सर का  स्वागत किया गया। इस मौके पर नगर निगम द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी नवसंवत्सर स्वागोत्सव महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 

रौद्रनाम नवसंवत्सर स्वागतोत्सव कार्यक्रम

रौद्रनाम नवसंवत्सर स्वागतोत्सव गुरुवार को जल विहार में प्रातः 4ः40 बजे संकीर्तन यात्रा के साथ प्रारंभ हुआ। प्रातः 4ः45 बजे गीत ज्योति कलश छलके, 5ः01 बजे दीप प्रज्वलन एवं गुडी पूजन, के साथ 5ः15 बजे सर्वधर्म प्रार्थना-जैन वाणी, सूर्य स्तुति, प्रातः 5ः18 बजे सुप्रभात गायन, 5ः21 बजे निवेदन गीत- इतनी शक्ति हमें देना, इसके बाद 5ः31 बजे संकल्प गीत- हम करें राष्ट्र आराधन और इसके बाद शहनाई वादन-गजानन वारूडे, बुरहानपुर, प्रातः 6ः00 बजे बांसुरी वादन- रवीन्द्र कुलश्रेष्ठ ग्वालियर, प्रातः 6ः10 बजे तुरही वादन, मंत्रोच्चारण के साथ ही प्रातः 6ः24 बजे सूर्य अर्ध्य के बाद प्रातः 6ः35 बजे शुभकामना संदेश महापौर द्वारा दिया गया। तत्पश्चात् प्रातः 6ः45 बजे आगोमोनी, प्रातः 7ः00 बजे लोक वाद्य कचहरी, प्रातः 7ः20 बजे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं प्रातः 8ः30 बजे वंदेमातरम की प्रस्तुति दी गई । 

 लोककला महोत्सव की प्रस्तुतियां शाम को होगी

इसके साथ ही लोक कला महोत्सव का आयोजन गुरुवार 19 मार्च को जल विहार में शाम 6ः00 बजे दीप प्रज्जवलन, शाम 6ः10 बजे ध्येय गीत, सायं 6ः20 बजे लोक गायन- सुश्री दीपिका पुरोहित भोपाल, शाम 6ः50 बजे नाटक- नवसंवत्सर- वन्दे मातरम समूह द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। इसी तरह शाम 7ः30 बजे लोक गायन बुन्देली- वासुदेव पुरोहित दतिया, 8 बजे लोक नृत्य बधाई, नौरता- सुधीर तिवारी और रात 8ः30 बजे विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं 9ः00 बजे वंदे मातरम की प्रस्तुति दी जाएगी। 

संवत्सर 2082 के विदाई महोत्सव में संगीत के सुरों से सजे मंच पर शास्त्रीय गायन,वादन और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां हुईं

ग्वालियर महानगर में बीती बुधवार शाम संगीत के सुरों के नाम रही। मौका था जल विहार का, जहां, तैरते मंच पर संगीत के सुरों से सजे मंच पर शहर के साथ देश के अन्य क्षेत्रों से आए कलाकारों द्वारा शास्त्रीय गायन,वादन और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। 
नगर निगम एवं संस्कार भारती द्वारा कालयुक्तनाम संवत्सर 2082 का विदाई महोत्सव बुधवार की शाम नवसंवत्सर की पूर्व संध्या में मनाया गया। इस अवसर पर जल विहार में आयोजित हुए कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व सांसद विवेक  शेजवलकर , नगर निगम सभापति मनोज तोमर, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो.स्मिता सहस्त्रबुद्धे, भाजपा जिलाध्यक्ष जय प्रकाश राजौरिया,महंत रामसेवक दास महाराज, पार्षद संजीव पोतनीस , एडिशनल कमिश्नर टी प्रतीक राव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में हुबली से आई हेमा बाघमोड़े और उनके 14 साथियों द्वारा भरतनाट्यम की अद्भुत प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। कुल 35 मिनट की  प्रस्तुति का शुभारंभ राग अरभी,ताल मिश्र चापू में पुष्पांजलि से किया गया, जिसमें हाथों में पुष्प लेकर देवी देवताओं का आह्वान किया गया। इसके बाद रागमालिका , ताल आदिताल में कृष्ण चरितम की अद्भुत प्रस्तुति दी गई, जिसमें कृष्ण के बाल स्वरूप से लेकर युवा स्वरूप को सौंदर्यता के साथ दर्शाया गया। इस मनोरम प्रस्तुति को देखकर हर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गया।
कार्यक्रम की शुरुआत संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुई। महोत्सव में काव्य मंजरी,  हवाइन गिटार के साथ साथ  कथक नृत्य की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। इसके अलावा स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा भी मंच से देखने को मिली।

*गत भाव में द्रोपदी की पुकार*
नृत्य के क्रम में कथक नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति भी देखने को मिली, जिसे जबलपुर से आई वरिष्ठ कलाकार शालिनी खरे ने अपनी शिष्याओं के साथ प्रस्तुत किया। पहली प्रस्तुति विष्णु वंदना से हुई। फिर तीन ताल में तराना की प्रस्तुति में  तोड़े, टुकड़े, परन आदि का मनोरम प्रस्तुतीकरण हुआ। इसी क्रम में शालिनी द्वारा तीन ताल में  गत भाव की  प्रस्तुति में द्रोपदी चीर हरण व पुकार का अद्भुत प्रस्तुतीकरण किया गया।

*जिंदगी प्यार का तराना है...*
संगीतमय प्रस्तुतियों के बाद काव्य मंजरी का आयोजन हुआ, जिसमें शहर के शहर के साथ प्रदेश के अन्य नगरों से आए कवियों ने काव्य पाठ किया। संचालन सुनीति बैस ने किया।
काव्य मंजरी की पहली प्रस्तुति देते हुए - कुन्दा जोगलेकर ने कहा - हमारी सारी उम्मीदें, अब तुम पर ही टिकी हैं।
संभाल लेना रौद्र— आते समय केवल आम्रमंजरियाँ मत लाना,
थोड़ी सद्बुद्धि भी बिखेरते आना।जिसमें वसंत की सुगंध हो......
इसके बाद -डॉ मुक्ता सिकरवार ने कहा- ज़िंदगी प्यार का तराना है, इसको हरदम ही गुनगुनाना है। राह में गुल भले मिले न मिलें,
संग कांटों के भी निभाना है।
- हमेशा रखते हैं रफ्तार अस्सी , प्रभू पहुंचायें इनको घर ठिकाने।
युवाओं पर असर होता नहीं है , बनाते हैं हज़ारों ये बहाने...

संवत्सर 2082 की विदाई बेला में ये रहे मौजूद -
वरिष्ठ समाजसेवी यशवंत इंदापुरकर, पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता, भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी  भी मौजूद रहे। साथ ही संस्कार भारती की ओर से संभाग प्रमुख शेखर दीक्षित, जिलाध्यक्ष डॉ चंद्रप्रताप सिकरवार सहित प्रदीप दीक्षित, दिनेश चंद्र दुबे आदि मौजूद रहे।