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"पीएमएफएमई योजना"; इस वर्ष 42 खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों का लक्ष्य,अब तक 557 हितग्राही लाभान्वित, PMFME से ग्वालियर में मिल रहे हैं स्वरोजगार के नए अवसर

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक युवाओं, उद्यमियों व किसानों के लिए बेहतर अवसर साबित हो रही है पीएमएफएमई योजना, कलेक्टर ने जिले के इच्छुक युवाओं से इस योजना का लाभ उठाने की अपील की है

ग्वालियर। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना ग्वालियर जिले में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक युवाओं, उद्यमियों व किसानों के लिए बेहतर अवसर साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से अब तक जिले के 557 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा चुका है। इस योजना के तहत मिले ऋण-अनुदान से इन हितग्राहियों ने सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भरता की दिशा में सफलतापूर्वक कदम आगे बढ़ाए हैं।

कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिले के किसानों, खाद्य प्रसंस्करण कार्य से जुड़े लोगों तथा स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक युवाओं से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। इच्छुक आवेदक उद्यानिकी विभाग से संपर्क कर योजना की पात्रता, आवश्यक दस्तावेज एवं आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर अपने आवेदन भर सकते हैं।

सहायक संचालक उद्यानिकी एमपीएस बुंदेला ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के प्रथम छह माह के लिए ग्वालियर जिले को 42 नई इकाइयाँ स्थापित करने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इनमें से अब तक आठ इकाइयाँ बैंकों के माध्यम से स्वीकृत की जा चुकी हैं। शेष पात्र आवेदनों के प्रकरणों पर भी तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

पीएमएफएमई योजना का उद्देश्य स्थानीय कृषि उपज पर आधारित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना तथा छोटे उद्यमियों को आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को बैंक ऋण के साथ अनुदान सहित विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे अपना उद्यम स्थापित कर आय में वृद्धि कर सकें। योजना के तहत इकाई लागत का 35 प्रतिशत अनुदान व 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाता है। अधिकतम 10 लाख रुपए अनुदान देने का प्रावधान है। योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी मेला मैदान के सामने स्थित सहायक संचालक उद्यानिकी कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा विकासखंड स्तर पर स्थित विभागीय कार्यालयों में भी संपर्क किया जा सकता है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा रही है।

ऐसी खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों के लिये मिलती है मदद

• फल उत्पाद - आम का अचार, केला चिप्स, अमचूर, अमावट, जूस इत्यादि अमरूद जैली, जैम, जूस, आंवला, केन्डी, चूर्ण, सुपारी, मुरब्बा, नीबू का अचार, मार्मेलैंड, स्क्वास, पाउडर, इत्यादि।

• सब्जी उत्पाद - टमाटर, केचप, चटनी, सॉस, ड्राय टोमेटो एवं पाउडर, मिर्च सॉस, ड्राय चिली, पाउडर, ग्रीन मिर्च पाउडर, करेला अचार, करेला जूस, आलू चिप्स, संसाधित सब्जियाँ इत्यादि।

• मसाला उत्पाद - हल्दी, धनियाँ, मिर्च पाउडर, अदरक सोंठ, ड्राय प्याज, लहसुन पेस्ट, अचार, मसाला चक्की इत्यादि ।

• अनाज उत्पाद - चावल मील, आटा मील, दाल मील, आटा चक्की, पोहा मील, पल्वराइज मील, गीला मसाला/गीली दाल पीसने वाली चक्की, धान मील, मक्का, गेहूँ आधारित उत्पाद इत्यादि।

• अन्य उत्पाद - पापड़, पास्ता, नमकीन, कुरकुरे, टेस्टी, ब्रेड, टोस्ट, बेकरी उत्पाद, साबूदाना उद्योग, बरी, गुड़, तेल मील, पेठा, गजक, चिक्की, पशु/पोल्ट्री आहार मछली पोल्ट्री, मांस फ्रीजिंग, मिल्क प्लांट, पनीर उद्योग, सोयाबीन का पनीर, घी उद्योग, दूध आधारित उत्पाद, भारतीय मिठाई उद्योग, तिलहन (सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, ऑयल सीड) आधारित उत्पाद ऐलविरों प्लांट, मूंनगा पत्ती पाउडर, केप्सूल इत्यादि ।

• सभी प्रकार की डीहाईड्रेशन यूनिट - सोलर एवं ओटोमेटिक सिस्टम ।

• इनके अलावा सभी तरह के फूड संबधित अन्य उत्पादों से संबंधित औद्योगिक इकाईयों के लिये भी योजना के तहत आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाती है।है।