भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के जंगलों की सुरक्षा के लिए 'देसी' कुत्तों को भर्ती करने का बड़ा प्रस्ताव दिया है। जर्मन शेफर्ड और बेल्जियम मैलिनोइस के बजाय अब भारतीय नस्ल के देसी कुत्ते शिकारियों पर लगाम कसेंगे। ये कुत्ते प्रदेश की भीषण गर्मी और कठिन रास्तों के लिए विदेशी नस्लों से बेहतर साबित होंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण के दिशा में हो रहे बेहतर कार्य के परिणाम स्वरूप प्रदेश में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस स्थिति में मानव-वन्य जीव सह अस्तित्व को प्रोत्साहित करने के लिए जनता को जागरूक करने तथा उन्हें आवश्यक सतर्कता बरतने के उपायों की जानकारी देना आवश्यक है। इसके साथ ही वन विभाग द्वारा पर्यटन विभाग से समन्वय करते हुए प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की मंत्रालय में हुई 31वीं बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव वन संदीप यादव सहित वन विभाग के अधिकारी और वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे।
बैठक में प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य के वन विभाग के श्वान दस्ते में विदेशी नस्लों की जगह देसी कुत्तों को शामिल करने का प्रस्ताव वन्य बोर्ड की बैठक में दिया है। यह कदम वन्यजीवों की सुरक्षा और अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का मानना है कि कुत्तो की देसी नस्लें मध्य भारत की गर्मी और घने जंगलों के लिए ज़्यादा उपयुक्त हैं। उन्होंने अधिकारियों को 'देसी K9 वाइल्ड-लाइफ यूनिट' बनाने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
यह प्रस्ताव बीते दिनों हुई को मध्य प्रदेश राज्य वन्यजीव बोर्ड की 31वीं बैठक में रखा गया है। अब तक, वन विभाग मुख्य रूप से जर्मन शेफर्ड और बेल्जियम मैलिनोइस जैसी विदेशी नस्लों पर निर्भर रहा है। लेकिन अब देसी नस्लों को वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षित कर गश्त, शिकारियों का पता लगाने और अपराध स्थलों पर सहायता के लिए तैनात करने की योजना है। मुख्यमंत्री यादव ने वन विभाग से नस्ल चयन, विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल,पशु चिकित्सा सहायता और बाघ अभयारण्यों व हाथी गलियारों जैसे संवेदनशील इलाकों में प्रायोगिक तौर पर तैनाती की योजना बनाने को भी कहा है।
'देसी K9 वाइल्ड-लाइफ यूनिट' बनाने पर जोर
अधिकारियों को पुलिस K9 इकाइयों और विशेष प्रशिक्षकों के साथ मिलकर एक ऐसी 'देसी K9 वाइल्डलाइफ यूनिट' बनाने पर काम करने को कहा है जो शिकार विरोधी अभियानों, रात में ट्रैकिंग, मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले इलाकों में त्वरित एक्शन और अपराध स्थलों पर स्मैल (गंध) की पहचान जैसे कामों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
