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खबर का असर -; मेले में भिक्षावृति करते चार अपाहिज़ बच्चों का रेस्क्यू किया, अभी बालक गृह “स्थल आदित्यम” में रखा है, बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किए जाएंगे

कलेक्टर के निर्देश के बाद सोमवार को प्रशासन के संयुक्त दल ने व्यापार मेला परिसर से भीख मांगने की स्थिति में पाए जाने पर चारों मासूम अपाहिज़ बालकों को संरक्षण में लिया है

ग्वालियर। जिला प्रशासन द्वारा बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत सोमवार को ग्वालियर व्यापार मेला परिसर में संयुक्त दल ने कार्रवाई करते हुए भिक्षावृत्ति की स्थिति में पाए गए चार बालकों को रेस्क्यू किया। बता दे कि ग्वालियर ब्रेकिंग ने बीते रोज रविवार के दिन व्यापार मेला में मासूमों से भिक्षावृत्ति की खबर को प्राथमिकता के साथ प्रसारित कर जिम्मेदारों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराकर ध्यान आकर्षित कराया था।  खबर को संज्ञान में लेकर कलेक्टर ने सोमवार को प्रशासन की संयुक्त टीम भेजकर  चारों मासूम बालकों को संरक्षण में लिया गया है।

खबर प्रसारित होने के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर गठित संयुक्त टीम—जिसमें जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल थे। इस टीम ने मेला परिसर के झूला सेक्टर क्षेत्र में पहुंचकर बालकों को संरक्षण में लिया। प्रशासन की संयुक्त टीम ने बालकों से प्रारंभिक पूछताछ की गई तथा उनकी माताओं से भी चर्चा कर बच्चों को भिक्षावृत्ति में संलग्न न करने की समझाइश भी दी गई।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि संबंधित बालक उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद के समीप ललितपुर क्षेत्र के निवासी हैं, और लगभग एक माह पूर्व मेला अवधि में यहां आए थे। टीम ने मामले  को बाल संरक्षण से संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

सभी बालकों को बाल कल्याण से संबंधित विधिक प्रावधानों के तहत सुरक्षित आश्रय के रूप में प्रगति महिला मंडल द्वारा संचालित बालक गृह “स्थल आदित्यम” में अस्थायी रूप से रखा गया है। आगामी कार्रवाई के सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहां समिति के निर्देशानुसार पुनर्वास एवं संरक्षण की वैधानिक प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि बाल श्रम अथवा बाल भिक्षावृत्ति जैसी किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल संबंधित विभाग को दें, ताकि बच्चों के अधिकारों की प्रभावी रूप से रक्षा की जा सके।सके।