राजनीति

"एक शाम अटल जी के नाम": ग्वालियर में पहली बार राजनीति के शिखर पुरुष 'चाणक्य' के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन हुआ, देशभर में इस नाटक की प्रस्तुतियां पिछले 37 वर्षों से हो रही हैं

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की शताब्दी वर्ष जयंती पर एक शाम अटल जी के नाम कार्यक्रम का आयोजन जेयू के अटल सभागार में बीती शाम किया गया

ग्वालियर । पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व.अटल बिहारी वाजपेई की 101वीं  जयंती के मौके पर "एक शाम अटल जी के नाम" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर अर्थशास्त्री और प्रखर राजनीतिज्ञ चाणक्य के जीवन पर आधारित नाटक चाणक्य की शानदार प्रस्तुति दी गई। जीवाजी विवि के अटल सभागार में हुए इस नाटक की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई। ग्वालियर की नवोदित कलाकार अंकिता कैलासिया ने इस अवसर पर माँ सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। 

कार्यक्रम के प्रारंभ में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई जी के चित्र पर मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाहा, पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया, अनूप मिश्रा, भाजपा के जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजोरिया, प्रेम सिंह कुशवाहा, समीक्षा गुप्ता, रामबरन सिंह गुर्जर,अभय चौधरी, नगर निगम सभापति मनोज तोमर, अशोक जैन, अशोक जादौन, विवेक शर्म सहित अन्य विशिष्ट जनों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी महेश मुद्गल ने किया। इससे पूर्व अटल स्मृति मंच के संयोजक देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर रामू भैया ने "एक शाम अटल जी के नाम" आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2019 से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि अटल जी की स्मृति में इस आयोजन से हमें लगातार प्रेरणा और ऊर्जा मिलती रही है, क्योंकि अटल जी का व्यक्तित्व ही ऐसा है। 

इस अवसर पर उन्होंने कहां की जो लोग राजनीति में आना चाहते हैं,  उन्हें अटल जी से प्रेरणा लेना चाहिए। राजनीति में अटल जी का कोई शत्रु नहीं था वह अजातशत्रु कहे जाते हैं। तोमर ने बताया एक शाम अटल जी के नाम कार्यक्रम की श्रृंखला में पहली बार ग्वालियर में राजनीति के शिखर पुरुष चाणक्य के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन किया जा रहा है। उन्होंने बताया पिछले 37 वर्षों से देशभर में इस नाटक की प्रस्तुतियां हो रही है। ग्वालियर में  आज ज्वलंत ऐतिहासिक नाटक का 1759 वां प्रदर्शन हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि मिहिर भूता द्वारा लिखित नाटक का निर्देशन और अभिनय मनोज नवनीत जोशी द्वारा किया गया है। चारु जोशी इस नाटक की प्रोड्यूसर हैं। चाणक्य टुकड़ों में बंटे भारत देश को किस तरह एक सूत्र में बांधा और एक शक्तिशाली राष्ट्र की स्थापना की, यह इस नाटक की थीम है। उन्होंने कहा कि हमने चाणक्य को देखा तो नहीं है लेकिन उनके बारे में सुना और पढ़ा जरूर है। तोमर ने कहा कि उस समय की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किस तरह एक सामान्य व्यक्ति को सत्तासीन करा कर एक साम्राज्य की स्थापना की। यह अपने आप में अनूठा और अद्भुत है। उन्होंने बताया कि चाणक्य का दर्शन उनका व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी सामायिक है। हमें उनके चरित्र और आदर्श से प्रेरणा लेना चाहिए।चाहिए।