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नानी बाई को मायरो: कथा क़े अंतिम दिन जया किशोरी को सुनने उमड़ी भीड़, बोलीं- भक्त भगवान पर भरोसा करे तो उसके सारे कष्ट खुद ही दूर हो जाते हैं

कथा क़े अंतिम दिन जया किशोरी ने भजन से कथा की शुरूआत की, कथा प्रवाह के साथ भजनों का ऐसा रंग जमा कि भक्त भक्ति में सराबोर होते नजर आए

ग्वालियर। शहर में वरिष्ठ कांग्रेस नेता दर्शन सिंह की स्मृति में खाटू श्याम मंदिर लाइन नम्बर एक के प्रांगण में चल रही कथा नानी बाई को मायरो में जया किशोरी ने भजन से कथा की शुरूआत की। इसके बाद कथा के सरस प्रवाह के साथ भजनों का ऐसा रंग जमा कि भक्त सुधबुध खोकर भक्ति में सराबोर होते नजर आए। 
ग्वालियर में कथा वाचक जया किशोरी के मुख से रोचक अंदाज में कथा सुनने लोगों की भीड़ जुट रही है। बिरला नगर हजीरा में नानी बाई मायरो कथा में प्रवचन देते हुए जया किशोरी ने कहा कि भगवान की भक्ति करना उतना आसान नहीं है जितना हम समझते हैं।
हम जैसे ही भगवान में मन लगाते हैं तो मन उचाट हो जाता है, लेकिन जिसको प्रभु की लगन लग जाती है तो उसे ओर कुछ नही सूझता है। ऐसे ही भक्त थे नरसी, जो गूंगे बहरे पैदा हुए थे, लेकिन उन्हें भक्ति लगी कि जहां भी कीर्तन होते थे तो वे वहीं मग्न होकर बैठ जाते थे। भगवान की कृपा से वे राधा कृष्ण बोलने लगे। सभी चकित थे। इसलिए जो भगवान पर भरोसा करता है तो उनके कष्ट खुद ही दूर हो जाते हैं।
उपनगर ग्वालियर विधानसभा के लाइन नम्बर एक में नानी बाई को मायरो कथा में जया किशोरी ने कहा बच्चों को बचपन से ही संस्कार दें। यदि आप यह सोचते हैं कि वे समझदार हो जाएंगे तब उन्हें संस्कार की बातें बताएंगे तो यह आपकी भूल होगी। बच्चे जब समझदार हो जाते हैं और आप उन्हें कुछ समझाना चाहते हैं तो फिर वे आपको समझदार नहीं समझते हैं।

प्रभु की भक्ति से राधे-कृष्ण बोलने लगे
जया किशोरी ने कहा हमें अंत में भगवान के पास जाना है। यह बात हम जितनी जल्दी समझ लें, उतना अच्छा है। हम जितना भगवान में मन लगाते हैं तो उतना ही वह उचटता है। एक बार जिसको प्रभु की लगन लग जाती है तो उसे कुछ और नहीं सूझता है। ऐसे ही थे भक्त नरसी। वे गूंगे-बहरे पैदा हुए, लेकिन भक्ति ऐसी थी कि रास्ते में कहीं भगवान का कीर्तन सुनाई दे जाए तो वहीं बैठकर मग्न हो जाते थे। जन्म से गूंगे होने के बाद भी वे भगवान की कृपा से राधे-कृष्ण बोलने लगे तो सभी चकित रह गए। भगवान पर भक्त भरोसा करते हैं, भगवान उनके सभी कष्ट दूर कर देते हैं। कथा क़े पहले मितेंद्र सिंह ने ठाकुरजी की पूजा-अर्चना की।

भगवान को भूलना आधुनिकता नहीं हो सकता
आधुनिकता के नाम पर अपनी संस्कृति और संस्कारों को भूल रहे युवाओं से जया किशोरी ने कहा आधुनिकता के नाम पर इतने आगे मत बढ़ जाओ कि आगामी पीढ़ी आपसे पूछे कि राधा-कृष्ण कौन हैं? नई चीजें सीखने, उनका अनुशरण करना बुरी बात नहीं है, लेकिन हमें अपनी पुरातन पंरपराओं को भी सहेजना होगा। मार्डन होने का अर्थ यह नहीं है कि हम भगवान को ही भूल जाएं। उन्होंने कहा कथा, भागवत और सत्संग में जाएं तो कुछ अच्छी बातें अवश्य लेकर आएं।