
ग्वालियर। तैरते हुए मंच पर लोक वाद्यों की धुन पारंपरिक नृत्य और संगीत की ध्वनि से नववर्ष का स्वागत करते युवा कलाकार तो दूसरी तरफ अर्घ्य देकर नववर्ष के सूर्य का स्वागत भी शहरवासियों द्वारा किया गया। ये सब देखने को मिला जल विहार में जहां रविवार को कालयुक्तनाम नव संवत्सर 2082 का स्वागतोत्सव हुआ। संस्कार भारती और नगर निगम की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम दो चरणों में हुआ। पहला चरण सुबह स्वागतोत्सव के रूप में तो दूसरा लोक कला महोत्सव के रूप में चला। दोनों ही चरण भारतीय संस्कृति की झलक दिखलाते दिखे।
सुबह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में बंगाली समाज द्वारा देवी स्तुति पर आगोमोनी की प्रस्तुति हुई,जिसमें मां दुर्गा के कई रूपों को दिखाने की कोशिश की गई। फिर दतिया के लोकवाद्य कचहरी का सुंदर प्रस्तुतिकरण हुआ। विनोद मिश्र और उनके साथियों द्वारा प्रस्तुत इस कचहरी में तुरही, शंख, झालर, नागफ़नी, इकतारा आदि दुर्लभ वाद्ययंत्रों से सूर्य का अभिवादन किया गया। फिर जगत नारायण द्वारा पखावज को चौताल में प्रस्तुत किया। उनके साथ सारंगी पर लहरा संगति अब्दुल हमीद ने की। अगली प्रस्तुति डॉ मोनिका श्रीवास्तव समूह द्वारा राग वसंत में शिव स्तुति, राधा कृष्ण नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति हुई। इसी क्रम में रंग सृष्टि संस्थान द्वारा राम चरित्र का सुंदर वर्णन भरतनाट्यम के माध्यम से किया गया।
इसके बाद शिखा समूह द्वारा राधा कृष्ण की गोपियों संग होरी को आकर्षक कथक नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। नृत्य के क्रम में विपिन राठौड़ समूह द्वारा कथक में ठुमरी की प्रस्तुति हुई। फिर शालिनी भटनागर समूह द्वारा भरतनाट्यम की प्रस्तुति हुई। फिर कृष्णा कदम द्वारा महाभारत संग्राम को नृत्य के माध्यम से पेश किया गया। रेडियंट स्कूल की ओर से योग मुद्राओं को दिखाया गया। राधे प्रिया समूह की ओर से भरतनाट्यम द्वारा मां आदि शक्ति के रूपो का वर्णन किया गया।अंतिम प्रस्तुति माइकल समूह द्वारा देशभक्ति गीत पर डांस की सुंदर प्रस्तुति हुई।
*बुंदेली संस्कृति की दिखी झलक*
सायंकालीन सभा के पूर्व संस्कार भारती द्वारा महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर दीपोत्सव भी किया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ रूपाली गोखले द्वारा ध्येय गीत से हुई। फिर शिवा नायक के निर्देशन में गुजरात का लोकनृत्य टिप्पणी डांस और मां आदि शक्ति की आगमन हेतु गरबा नृत्य का आकर्षक प्रस्तुतिकरण हुआ। इसके बाद कृतिंद्र सिंह सूर्यवंशी और उनके साथियों द्वारा पारंपरिक बुंदेली सुमिरनी, लमेटरा, बधाई, कार्तिक, कार्तिक, झूला, होरी और राई का सुंदर प्रस्तुतिकरण किया गया। उनके साथ हरमोनियम पर आकृत कुमार, ढोलक पर अनुनय शर्मा, प्रांत साहू, बांसुरी पर अक्षत मिश्रा रहे।
*दिखी लद्दाख की नृत्य कला*
इस सभा का एक और खास आकर्षण सुक्षम और उनके साथियों द्वारा जम्मू,कश्मीर और लद्दाख के खास लोक नृत्यों की प्रस्तुति मंच से हुई। पहले जम्मू का खास डोगरी लोक नृत्य प्रस्तुत किया गया। इसी समूह द्वारा कश्मीरी नृत्य का आकर्षक प्रस्तुतिकरण हुआ । इसी क्रम में लद्दाखी लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति हुई।
*विरसा मुंडा को किया जीवंत*
लोकनृत्य में एक और खास आकर्षण बैतूल का खास गौंडी गायिकी ठाठिया लोक नृत्य भी रहा, जिसमें बैतूल से आए ओम प्रधान और उनके साथियों द्वारा आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी विरसा मुंडा की कहानी को नृत्य नाटिका के माध्यम से जीवंत किया गया।
*चैत्र मास में गाए जाने वाले गीत चैती का गायन*
नृत्य के बाद डॉ पारुल दीक्षित द्वारा उपशास्त्रीय गायन की सुंदर प्रस्तुति हुई। उन्होंने पहले ठुमरी प्रस्तुत की, जिसके बोल थे लागे तोसे नैन..। फिर चैत्र मास में गाए जाने वाले गीत चैती का गायन हुआ, जिसके बोल थे चैत मास बोलेले कोयलिया...। इसके बाद सावन मास में गाए कजरी उसके बाद होरी और झूला की सुंदर प्रस्तुति हुई। उनके साथ हारमोनियम पर विवेक जैन, तबले पर विकास विपट ने संगति की।
*ये भी रहा खास *
सुबह के चरण की शुरुआत संकीर्तन यात्रा से हुई। उसके बाद लक्ष्मी धवल द्वारा ज्योति कलश छलके...गीत, फिर ध्येय गीत, सर्वधर्म प्रार्थना के बाद नरेंद्र कुंटे द्वारा प्रस्तुत सुप्रभात गायन हुआ। नवनीत कौशल द्वारा संकल्प गीत फिर निवेदन गीत की प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम संचालन प्रदीप दीक्षित, अनामिका अग्रवाल,दिनेश चंद्र दुबे और ने बृज किशोर दीक्षित ने किया
* कार्यक्रम में ये रहे मौजूद *
पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता, संस्कार भारती के महानगर अध्यक्ष डॉ संजय धवले, कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश चंद्र दुबे, महामंत्री चंद्रप्रताप सिकरवार, सहमहामंत्री डॉ मानव महंत और कोषाध्यक्ष आशुतोष वाजपेयी सहित अतुल अधोलिया, अनीता करकरे, संयोजक शेखर दीक्षित, प्रदीप दीक्षित आदि उपस्थित रहे।