ग्वालियर जिले के किसानों के लिये सरकार द्वारा लगातार खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में डबल लॉक, प्राथमिक सहकारी संस्थाओं एवं खाद की निजी दुकानों में वर्तमान में कुल मिलाकर 19 हजार 700 मैट्रिक टन रासायनिक उर्वरक (खाद) उपलब्ध है। जिसमें यूरिया 4056 मैट्रिक टन, डीएपी 3512 मैट्रिक टन, एमओपी 167 मैट्रिक टन, एनपीके 6238 मैट्रिक टन व एसएसपी 5697 मैट्रिक टन शामिल हैं। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने किसानों को फसल के हिसाब से खेतों में उर्वरक देने के लिये उपयोगी सलाह दी है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने कृषि विभाग के मैदानी अमले को गाँव-गाँव जाकर किसानों को फसल के हिसाब से उर्वरक का उपयोग करने की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
किसानों से अधिक उत्पादन को "NPK" उपयोग की अपील
उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास आरबीएस जाटव ने बताया कि किसान भाईयों से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिये एनपीके रासायनिक उर्वरक उपयोग करने की अपील की गई है। इस उर्वरक में डीएपी की तुलना में ज्यादा पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में महती भूमिका निभाते हैं।
किसान भाईयों को कृषि विभाग की सलाह:- खेतों में इस प्रकार करें खाद का उपयोग
उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने बताया कि किसान भाइयो से अपील की गई है कि जिले में रबी सीजन की फसलो में संतुलित उर्वरक का उपयोग करें। उन्होंने सलाह दी है कि प्रति हैक्टेयर विकल्प अनुसार उर्वरक उपयोग करें। गेहूँ व जौ फसल में प्रथम विकल्प यूरिया 5 बोरी, एनपी के 4 बोरी, द्वितीय विकल्प यूरिया 4 बोरी, डीएपी 3 बोरी व एमओपी एक बोरी एवं तृतीय विकल्प यूरिया 6 बोरी, एसएसपी 6 बोरी व एमओपी एक बोरी खेतों में डालें।
इसी तरह चना, मटर व मसूर फसलों के लिये प्रथम विकल्प एनपीके 3 बोरी, द्वितीय विकल्प डीएपी 2 बोरी व एमओपी एक बोरी एवं तृतीय विकल्प यूरिया एक बोरी, एसएसपी 3 बोरी व एमओपी एक बोरी इस्तेमाल करना चाहिए।
सरसों व अलसी की फसलों के लिये प्रथम विकल्प यूरिया 2 बोरी, एनपीके 2 बोरी, द्वितीय विकल्प यूरिया 2 बोरी, डीएपी 2 बोरी व एमओपी एक बोरी एवं तृतीय विकल्प यूरिया 3 बोरी, एसएसपी 3 बोरी व एमओपी एक बोरी के हिसाब से फसलों में उपयोग किया जा सकता है। किसान भाई इन उर्वरकों में से उपलब्ध उर्वरक के अनुसार अपने खेतों में खाद देकर अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
