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पुस्तक मेले का कलेक्टर ने औचक निरीक्षण किया ; देर से दुकान खोलने वाले पुस्तक विक्रेताओं के खिलाफ होगी कार्रवाई

कलेक्टर ने निरीक्षण कर दुकानदारों को आगाह किया, देर से दुकान खोलने पर माना जायेगा कि सेलर्स किताबों व स्टेशनरी इत्यादि की अधिक कीमत लेना चाहते हैं

ग्वालियर। पुस्तक मेले में जो दुकानदार निर्धारित समय पर अपनी दुकान नहीं खोलेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। देर से दुकान खोलने पर यह माना जायेगा कि दुकानदार अभिभावकों से किताबों व स्टेशनरी इत्यादि की अधिक कीमत लेना चाहते हैं। यह बात कलेक्टर रुचिका चौहान ने बुधवार को पुस्तक मेले के निरीक्षण के दौरान संबंधित दुकानदारों को आगाह करते हुए कही। 

कलेक्टर  चौहान ने कुछ दुकानदारों द्वारा देरी से दुकानें खोले जाने की शिकायत मिलने पर पुस्तक मेले का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने देरी से खुली दुकानों पर पहुँचकर दुकान संचालकों को आगाह किया कि आगे से ऐसी स्थिति न बने अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। शहर में जहां पर भी दुकान संचालित है वहाँ पर छापामार कार्रवाई कराई जायेगी। उन्होंने सभी दुकानदारों को निर्देश दिए कि वे अपनी-अपनी दुकान पर डिस्काउंट (छूट) की सूची अनिवार्यत: प्रदर्शित करें। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि निर्धारित डिस्काउंट न देने वाले पुस्तक विक्रेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जायेगी। 

बुधवार को भी पुस्तक मेले में अच्छी रौनक रही। पुस्तक मेले में दुकानदारों ने किताबों, स्टेशनरी व ड्रेस पर छूट और बढ़ा दी है। यह जानकारी मिलने पर बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों के साथ मेले में खरीददारी करने पहुँचे । पुस्तक मेले में बाजार में मिलने वाले सभी तरह के डिस्काउंट के अलावा किताबों पर 10 प्रतिशत तक, स्टेशनरी पर 15 से 20 प्रतिशत एवं यूनीफॉर्म पर 30 प्रतिशत तक छूट दी जा रही है। 

ज्ञात हो अभिभावकों को उनके बच्चों के लिये सस्ती दर पर किताबें, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म दिलाने के लिये जिला प्रशासन द्वारा मेला स्थित शिल्प बाजार में सात दिवसीय पुस्तक मेला लगाया गया है। यह पुस्तक मेला 29 मार्च तक चलेगा। 

बुक बैंक सेक्टर का भी लिया जायजा 

कलेक्टर  रुचिका चौहान ने पुस्तक मेले में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिये स्थापित किए गए बुक बैंक सेक्टर का भी जायजा लिया। इस सेक्टर में कक्षावार पुस्तकें दान में प्राप्त करने के लिये काउण्टर बनाए गए हैं। जिनमें जिले के अभिभावक उत्साहपूर्वक अपने बच्चों के पिछली कक्षाओं की किताबें दान देने आ रहे हैं।