
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज का दिन प्रदेश के चीता प्रोजेक्ट और वन्य जीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। श्योपुर स्थित राष्ट्रीय कूनो उद्यान में दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता "गामिनी" और उसके चार शावकों को बाड़े से मुक्त कर राष्ट्रीय उद्यान में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जैव विविधता की दृष्टि से, दक्षिण अफ्रीका से प्रदेश की धरती पर चीतों का पुनर्वास, देश ही नहीं अपितु एशिया महाद्वीप का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। इस इंटरकांटिनेंटल प्रोजेक्ट के लिए कूनो (श्योपुर) का चयन, प्रदेश के लिए सौभाग्य का विषय है। प्रदेश के वन विभाग के अमले की लगन और अथक परिश्रम से इस व्यापक परियोजना का सफल क्रियान्वयन संभव हो पाया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ रहा है। इससे पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और चंबल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था समग्र रूप से सशक्त होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को जारी संदेश में यह विचार व्यक्त किए।
कुनो में पर्यटकों को सहजता से मिलेगा चीता देखने का अवसर, पार्क में अब 17 चीते स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं
श्योपुर जिले के राष्ट्रीय कूनो उद्यान में दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता "गामनी" और उसके चार शावकों को सोमवार को बाड़े से सफलतापूर्वक कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल के खजूरी वन क्षेत्र में छोड़ा है। खजूरी वन क्षेत्र अहेरा पर्यटन जोन का एक हिस्सा है। इस पर्यटन क्षेत्र में चीतों की उपस्थिति से पर्यटकों को चीता देखने का अवसर मिलेगा। इससे पर्यटन की गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान संचालक सिंह परियोजना ने बताया कि राष्ट्रीय कूनो उद्यान में चीता "गामनी" और उसके चार शावकों को खुले जंगल में छोड़ने के बाद अब कूनों पार्क में 17 चीते जिसमें 11 शावक शामिल हैं, स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। अब बाढ़े में 9 चीते शेष हैं, इनमें 3 शावक शामिल है। इस प्रकार कूनो नेशनल पार्क में कुल 26 चीते है, जो सभी पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं।हैं।
सीएम ने गर्मी में सार्वजनिक प्याऊ लगाने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गर्मी के मौसम को देखते हुए जिलों के कलेक्टर, नगरीय निकायों तथा पंचायतों को सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा उपयुक्त स्थलों पर छाया की व्यवस्था भी की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस संबंध में जन प्रतिनिधियों से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि जन सामान्य के लिए ग्रीष्म ऋतु में प्याऊ लगवाने की परंपरा प्राचीन काल से रही है। जल संरक्षण के साथ-साथ जल की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को दिए संदेश के माध्यम से प्रदेशवासियों से जल गंगा अभियान के अंतर्गत बूंद- बूंद जल बचाने के लिए संचालित होने वाली गतिविधियों में सहभागिता करने का भी आव्हान किया।