
भोपाल। गर्मी का मौसम हो और फलों के राजा आम की बात न हो ऐसा कैसे हो सकता है। गर्मियां आते ही बाजारों में आम की बड़ी संख्या में दुकानें नजर आती हैं। आम की कई किस्में हैं, जो अपने- अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं, जहां बनारसी लंगड़ा आम का अपने आप में एक अलग मुकाम है, तो वहीं प्रसिद्धि में राजगढ़ की रियासत काल के कोठीबाग का आम भी कम लाजवाब नहीं है।
प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 140 किमी की दूरी पर बसे राजगढ़ जिला मुख्यालय में छोटे पुल के पास स्थित रियासतकाल के कोठीबाग का लंगड़ा आम देशभर में प्रसिद्ध है। जिसकी सालभर देखभाल कृषि विभाग की निगरानी में की जाती है और सीज़न में सरकारी पद्धति से पेड़ों को नीलाम किया जाता है।
राजगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र में मृदा वैज्ञानिक व कोठीबाग क्षेत्र प्रभारी भगवान सिंह बताते हैं कि, हमारे क्षेत्र में बहुत से फलों के पेड़ लगे है, लेकिन आम के जो पेड़ हैं वो काफी अच्छे फल देते हैं और प्रसिद्ध भी हैं। इसका फल देश के अन्य भागों में भी भेजा जाता है। कोठीबाग में लगभग 60 से 62 आम के पेड़ हैं, जिनमें इस वर्ष पूरी तरह से फलन हुआ है और इसकी नीलामी खुली बोली के माध्यम से की जाती है।
दिल्ली, राजस्थान और उप्र तक प्रसिद्ध
पीढ़ियों से कोठीबाग का ठेका लेते आ रहे असलम राईन बताते हैं कि कोठीबाग का लंगड़ा आम सिर्फ राजगढ़ में ही नहीं बल्कि दिल्ली, राजस्थान और उत्तरप्रदेश तक प्रसिद्ध है। यहां के आम की खासियत है कि यह 80 प्रतिशत पेड़ में ही पक जाता है और इसे 20 प्रतिशत पकाने के लिए प्राकृतिक घास व पेड़ों की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। दो से तीन दिन तक प्राकृतिक तरीके से पकाने के बाद लंगड़े आम की मांग के आधार पर पार्सल के माध्यम से इसे दिल्ली, राजस्थान व उत्तरप्रदेश तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने कहा कि लोकल में भी इसकी अधिक डिमांड है, जिसके लिए वे राजगढ़ के मुख्य बाजार में हाथ ठेले के माध्यम से कोठीबाग के आम का विक्रय करते हैं।