
ग्वालियर। पूरे देश व प्रदेश के साथ ग्वालियर जिले के लिये भी एक जुलाई का दिन ऐतिहासिक बना है। भारतीय नागरिकों को संविधान में दिए गए सभी अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिये तीन नए कानून इस दिन से ग्वालियर जिले में भी लागू हो गए हैं। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रुचिका चौहान ने नए कानूनों के प्रमुख बिंदुओं का वाचन कर ग्वालियर जिले में इन कानूनों का स्वागत किया।
जिन पुराने अधिनिय़मों में बदलाव किया गया है, उनमें भारतीय दंड संहिता 1860, दंड प्रक्रिया संहिता (1898), 1973 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 शामिल हैं। भारतीय दंड संहिता 1860 के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023 को लागू किया गया है। इसी तरह दंड प्रक्रिया संहिता 1898 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2023 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 के स्थान पर भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 लागू किया गया है। तीनों नए कानून एक जुलाई से प्रभावशील हो गए हैं।
बंदियों को दी नवीन कानूनों की जानकारी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं केन्द्रीय जेल ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में एक जुलाई से लागू किये की गई तीन नवीन विधियों के संबंध में बंदियों के मध्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। केन्द्रीय जेल में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में जिला विधिक सहायता अधिकारी दीपक शर्मा एवं जेल के सेवानिवृत्त अधिकारी वरिष्ठ अधिवक्ता एसएल खुराना ने नवीन विधियों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की।
इस अवसर पर वरिष्ठ जेल उपाधीक्षक अनिरुद्ध सिंह नरवरिया, ममता नार्वे, सहायक जेल उपाधीक्षक विपिन दंडोतिया, प्रवीण त्रिपाठी सहित जेल के कर्मचारी व बंदी उपस्थित रहे।
नवीन विधियों के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं द्वारा बताया गया कि देशभर में एक जुलाई से तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं। इसी के साथ परतंत्र भारत में बने कानूनों का अस्तित्व खत्म हो गया है। ब्रिटिश काल के भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (CrPC) और इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 (IEA) की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023(BSA) लागू हो गए हैं तथा 01 जुलाई से प्रवर्तन में आ गये हैं।
नए कानूनों में न केवल अव्यवहारिक प्रावधानों को समाप्त किया गया है बल्कि नये व्यवहारिक प्रावधानों को शामिल किया गया है। नये कानूनों में महिला, बालकों, वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष उपबंध किये गये हैं, न्यायदान प्रक्रिया को त्वरित एवं प्रभावी रूप से कार्य करने के लिए सशक्त किया गया है। साथ ही डिजिटलीकरण को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है। संगठित अपराध, मॉब लिंचिंग, आंतकवाद ,राष्ट्रद्रोह आदि अपराधों को जोड़ा गया है तथा कई अपराधों में सजा और जुर्माना राशि में वृद्धि हुई है। छोटे मामलों में सामुदायिक दंड, प्ली बार्गेनिंग के लिए समय सीमा, बंदियों के लिए विशेष उपबंध, वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी , अन्वेषण एवं विचारण में तकनीक का उपयोग आदि प्रावधान समाहित कर न्यायालयीन प्रक्रिया को तीव्रता प्रदान प्रदान की गई है।
पुरानी जांच और ट्रायल पर असर नहीं
ऐसे मामले जो एक जुलाई से पहले दर्ज हुए हैं, उनकी जांच और ट्रायल पर नए कानून का कोई असर नहीं होगा। एक जुलाई से सारे अपराध नए कानून के तहत दर्ज होंगे। अदालतों में पुराने मामले पुराने कानून के तहत ही सुने जाएंगे। नए मामलों की नए कानून के दायरे में ही जांच और सुनवाई होगी।